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20 दिसंबर 2010

तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालयःकुलपति चयन प्रक्रिया पर विवादों का साया

राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के कुलपति पद की चयन प्रक्रिया पर विवादों का साया मंडराने लगा है। कुलपति के चयन के लिए गठित समिति की ओर से 19 दिसंबर को होने वाले साक्षात्कार के लिए बुलावा नहीं आने से खफा उम्मीदवार ने न्यायालय में जाने का फैसला लिया है।

समिति ने रविवार को होने वाले साक्षात्कार के लिए आवेदन करने वाले 98 में से केवल 10 उम्मीदवारों को ही साक्षात्कार के लिए बुलाया है। इनमें से ही पांच का चयन कर इनकी सिफारिश राज्यपाल व कुलाधिपति के. शंकरनारायण के पास की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि संत गाड़गेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ. कमल सिंह ने चयन समिति के प्रमुख सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ए.पी. शाह को इस संबंध में पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जतायी है।

पत्र में उन्होंने पद के लिए आवेदन करने वाली महिलाओं में से एक भी महिला उम्मीदवार को साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। पद के लिए विवि के लोकप्रशासन विभाग की प्रमुख डॉ. नीलिमा देशमुख और महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मृणालिनी फडणवीस का समावेश है।


उनका नाम अंतिम 10 की सूची में शामिल किया गया था। इसके अलावा विवि के ही ललित कला विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. विनोद इंदुरकर का भी नाम पैनल में शामिल था। दोनों ही ऐसे उम्मीदवार है जिन्हें डी.लिट की उपाधि प्राप्त है। विवि के पूर्व प्र-कुलपति डॉ. गौरीशंकर पाराशर को भी साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाया गया है। डॉ. पाराशर ने दो विषयों में पी.एच.डी की है।

वकीलों से ले रहे हैं सलाह: डॉ. देशमुख 
डॉ. देशमुख ने भास्कर के साथ बातचीत में कहा कि इस संबंध में हम अपने वकीलों से सलाह ले रहे हैं। सलाह आने के बाद याचिका दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा कि बिना किसी वजह से प्रक्रिया से अलग किया गया है। 

उन्होंने महाराष्ट्र विश्वविद्यालय अधिनियम 1994 में संशोधन के औचित्य पर ही सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मुंबई विवि में 327 उम्मीदवार थे। इसके बाद भी उनका नाम अंतिम सूची में था, लेकिन रातुम नागपुर विवि में केवल 98 उम्मीदवार रहने के बावजूद उनका चयन नहीं हुआ है(दैनिक भास्कर,नागपुर,20.12.2010)।

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