पुनर्मूल्यांकन मे ज्यादा आवेदनों से हो रही परेशानी को देखते हुए रविवि प्रशासन नया उपाय अपनाने पर विचार कर रहा है। इसके तहत पुनर्मूल्यांकन से पहले ही छात्रों को उत्तरपुस्तिका की फोटोकापी दी जा सकती है।
मूल्यांकन में मिले अंक देखकर छात्र स्वयं तय कर सकेंगे कि उन्हें पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करना है या नहीं। रविवि के कुलसचिव केके चंद्राकर का कहना है कि नई व्यवस्था को अगले साल से शुरू किया जाएगा।
हर साल पुनर्मूल्यांकन के लिए पीजी और यूजी के तकरीबन ४क् हजार आवेदन आते हैं। जुलाई-अगस्त में मुख्य परीक्षा के परिणाम आने के बाद आवेदनों का सिलसिला शुरू हो जाता है। इसके बाद परिणाम के लिए छात्रों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। वहीं विवि को भी परेशान होना पड़ता है।
जानकारों का कहना है कि छात्र थोड़ी सी उम्मीद होने पर भी आवेदन कर देते हैं। इसके नियम इतने सख्त हैं कि पुनमरूल्यांकन के बहुतेरे मामलों में रिजल्ट जस का तस रहता है। शुल्क कम होने के कारण भी बड़ी संख्या में आवेदन आते हैं। शुल्क को एक सीमा से आगे रविवि नहीं बढ़ाना चाहता।
विवि के अफसरों का कहना है कि नई व्यवस्था शुरू होने के बाद आवेदनों की संख्या में कमी होगी, परिणाम जल्दी जारी किए जा सकेंगे। अभी उत्तरपुस्तिका की फोटोकापी के लिए छात्रों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
सबसे पहले पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करना पड़ता है।परिणाम महीने दो महीने बाद आता है।इसके बाद ही उन्हें उत्तरपुस्तिका की फोटोकॉपी मिल पाती है(दैनिक भास्कर,रायपुर,20.12.2010)।
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