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15 दिसंबर 2010

भागलपुर विश्वविद्यालयःगांधियन थॉट नहीं दे रही नौकरी

पाठ्यक्रम की डिग्री साथ लिये रोजगार के लिए भटक रहे हैं छात्र। यह हाल है स्नातकोत्तर गांधी विचार विभाग का जिसकी पढ़ाई केवल भागलपुर विवि में होती है । अब तक इस विषय में 1400 से ज्यादा छात्र एमए कर चुके हैं । 50 से ज्यादा छात्र पीएचडी कर चुके हैं तो 40 से ज्यादा ने नेट उत्तीर्ण कर लिया है । जेआरएफ भी हैं । लेकिन इतने के बाद भी इस विषय में इन छात्रों को भविष्य नजर नहीं आता। इंटर और डिग्री स्तर पर भी इस विषय की पढ़ाई नहीं होती। इंटरमीडिएट के पाठ्यक्र म में 1984 से चल रहे इस विषय को 2006 में हटा दिया गया था। मतलब इस विषय में एमए पास छात्र स्कूलों में इस विषय के शिक्षक नहीं बन सकते। कॉलेजों में शिक्षकों की नई बहाली फिलहाल हो नहीं रही जो ये छात्र वहां भी जगह पा सकें। बुनियादी विद्यालयों में शिक्षक बनने की आशा थी लेकिन वह भी दूर की कौड़ी नजर आ रही है। राज्य के तत्कालीन शिक्षा मंत्री वृषिण पटेल ने इन छात्रों को 391 बुनियादी स्कूलों में शिक्षक के रूप में समायोजित करने का सपना दिखाया था। यह घोषणा उन्होंने गांधी विचार विभाग से ही की थी। लेकि न अब तक वह घोषणा सपने की तरह ही है । हालत यह है कि 1996 में विभाग के लिए संबंधित विषय के तीन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। दो शिक्षक दूसरे विवि चले गए और विभाग में उस विषय के एक ही शिक्षक रह गए हैं। शिक्षकों की क मी दूसरे विषय के शिक्षकों से दूर की जा रही है(अभिषेक,हिंदुस्तान,भागलपुर,15.12.2010)।

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