अगले सत्र से नए मेडिकल कालेजों के खुलने, सीटों में इजाफे और प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेस टेस्ट (सीईटी) आयोजित किए जाने से डाक्टरी में एडमिशन के लिए डोनेशन का सिलसिला खत्म हो जाएगा। मेडिकल कालेज मैनेजमेंट कोटे में एडमिशन के लिए छात्रों से डोनेशन नहीं ले पाएंगे क्योंकि मैनेजमेंट कोटा भी सीईटी की मेरिट से भरा जाएगा। दूसरे, पुराने कालेजों में सीटें बढ़ रही हैं । करीब 78 नए कालेज खुलने की कतार में हैं । इन सभी कालेजों में एडमिशन के लिए सिर्फ एक टेस्ट सीईटी होगा। इस बीच सुप्रीम कोर्ट से टेस्ट को हरी झंडी मिलने के बाद केंद्र सरकार ने राज्यों को सोच-विचार के लिए डेढ़ महीने का समय देते हुए अगले महीने 30 जनवरी को टेस्ट को अंतिम रूप देने के लिए राज्यों की बैठक बुलाई है । एमसीआई के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य डा. आर एन सलहन ने कहा चूंकि सीईटी में सभी कालेजों के एडमिशन को रेगुलेट किया जाएगा इसलिए कोई भी कालेज मैनेजमेंट कोटे में सीधे डोनेशन लेकर एडमिशन नहीं कर पाएगा। मैनेजमेंट कोटे पर भी सीईटी की मेरिट पर सीट मिलेगी। इसलिए जो छात्र मेरिट में होगा वह निजी कालेजों को डोनेशन देने की गलती क भी नहीं करेगा। इसलिए सीईटी लागू होने से एमबीबीएस में डोनेशन की प्रवृत्ति रुकेगी। वैसे भी एमबीबीएस सीटों में इजाफे आदि से भी डोनेशन देकर एडमिशन का कारोबार अब ज्यादा नहीं चलने वाला है । निजी कालेजों में 15 फीसदी मैनेजमेंट कोटा होता है जिसमें एडमिशन के लिए 10-15 लाख रुपये वसूले जाते हैं । एमसीआई को इस साल 105 पुराने कालेजों ने सीटें बढ़ाने के लिए आवेदन किया है । ये कालेज सीटों की संख्या 250 तक बढ़वा सकते हैं लेकिन पहले इनके बुनियादी ढांचे की जांच होगी। इसी प्रकार 78 प्रस्ताव मेडिक ल कालेजों के लिए आए हैं । मेडिकल कालेजों की स्थापना आदि के लिए नियमों में ढील देकर सरकार ज्यादा से ज्यादा मेडिकल कालेज खोलना चाहती है । अभी 316 मेडिकल कालेज हैं जिनमें करीब 35 हजार एमबीबीएस सीटें हैं । सीटें बढ़ने और नए कालेज खुलने से सीट संख्या अगले सत्र में 50 हजार पार कर जाएगी(मदन जैड़ा,हिंदुस्तान,दिल्ली,15.12.2010)।
सुखद समाचार। धन्यवाद।
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