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18 दिसंबर 2010

मध्यप्रदेशःसरकार के गले की फांस बना छठा वेतनमान

प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों को छठवें वेतनमान का लाभ देने के बाद सरकारी बजट की स्थिति बिगड़ गई है। साथ ही,सरकार को यह चिंता भी सता रही है कि इतने बडे़ खर्च की पूर्ति कहां से की जाए। हालांकि राज्य सरकार की आय बढ़ाने के लिए वित्त विभाग के आला अफसरों सहित अन्य विशेषज्ञ मशक्कत करने में लगे हैं, लेकिन उन्हें इस संकट से उबरने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं सूझ रहा है। वित्त मंत्री राघवजी के अनुसार प्रदेश में लगभग पौने पांच लाख कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन खर्च 10300 करोड़ रुपए था, जो कि छठवें वेतनमान के बाद 14600 करोड़ रुपए का हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य के ऊपर एक दम से 4100 करोड़ रुपए का खर्च आ जाने से उसकी बजटीय व्यवस्था गड़बड़ा गई है। वित्तमंत्री ने बताया कि इसके लिए आला अधिकारी और आर्थिक विशेषज्ञ राज्य सरकार की आय में इजाफा करने के लिए नए स्रोतों को ढूंढने में लगे हैं। वहीं राज्य सरकार को फ्री होल्ड लीज और पीपीपी मोड पर होने वाले विकास कार्यो से भी राहत मिलने की संभावना है। राज्य सरकार का वर्ष 2010-11 में लगभग 49 हजार 700 करोड़ का बजट है। प्रदेश में विकास कार्यो के बढ़ने और नए वेतनमान से बढे़ भार को देखते हुए वर्ष 2011-12 का बजट 60 हजार करोड़ रखे जाने की संभावना है। जानकारों का मानना है कि यदि राज्य सरकार खनिज रॉयल्टी, वाणिज्यिक कर, पंजीयन आदि के करों के लीकेज को रोक ले तो सरकार की आय में कई हजार करोड़ की बढ़ोतरी हो सकती है(हरीश दिवेकर,दैनिक जागरण,भोपाल,18.12.2010)।

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