प्रदेश में कुशल कारीगरों की संख्या बढ़ाने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) में अब अल सुबह से लेकर रात तक पढ़ाई होगी। भवन और कक्षाओं के साथ क्लास तो एक ही होंगे, लेकिन इनमें पढ़ने और पढ़ाने वाले चेहरे सुबह से शाम तक तीन बार बदल जाएंगे। असल में अब आईटीआई में एक साथ तीन शिफ्ट में कक्षाएं लगाई जाएंगी। प्रदेश की चुनिंदा संस्थाओं ने यह प्रयोग शुरू भी कर दिया है। साल दर साल यह नजारा प्रदेश भर की संस्थाओं में नजर आने लगेगा। राज्य शासन ने प्रदेश में आईटीआई की सीटों की संख्या एक लाख करने का लक्ष्य बनाते हुए यह प्रयोग इस बार चुनिंदा और सर्व सुविधायुक्त संस्थाओं में शुरू किया है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत भोपाल जोन में पांच संस्थाओं को चुना गया है। इनमें इस साल से एक साथ तीन शिफ्ट चलाई जा रही हैं। पहली शिफ्ट में जहां सुबह साढ़े छह बजे से क्लासेस शुरू कर दी जाती हैं तो दूसरी सुबह साढ़े आठ और तीसरी शिफ्ट दोपहर ढाई से रात साढ़े नौ बजे तक चलती है। सूत्रों के मुताबिक पायलट प्रोजेक्ट के लिए बड़े शहरों को ही ध्यान में रखा गया है। इनमें भोपाल के अलावा जबलपुर, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन और रीवा शामिल हैं। इनमें भी ऐसी संस्थाओं को प्राथमिकता दी गई, जहां अधिकतम ट्रेड उपलब्ध हैं। इसके लिए संस्थाओं से ही प्रस्ताव मांगे गए थे। प्रस्ताव में शिक्षक, कार्यालयीन स्टाफ, वर्कशाप, उपकरण आदि की उपलब्धता को भी देखा गया। शिक्षकों पर एक दम से तीन गुना भार न पड़े, इसकी भी व्यवस्था की गई। संविदा शिक्षकों और अतिथि विद्वानों की भर्ती की गई। साथ ही इन संस्थाओं के शिक्षकों को भी यह विकल्प दिए गए कि वे चाहें तो एक से अधिक शिफ्ट में भी पढ़ा सकते हैं। इसके लिए उन्हें अतिरिक्त भत्ता भी दिया जाएगा। ताकि उन्हें यह अतिरिक्त काम बोझ न लगे(प्रवीण शर्मा,दैनिक जागरण,भोपाल,18.12.2010)।
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