तपोवन की तपोभूमि पर राजनैतिक मुद्दों के तीरों से सदन पूरी तरह से गरमाया रहा। ग्यारहवीं विधानसभा के दसवें सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल से शुारू हुआ सदन शिक्षा बोर्ड फर्जीवाड़े के मामले में इतना गरमाया कि विपक्ष ने बाहर जाकर नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि विपक्ष ने जिस मांग को लेकर सदन से बाहर जाने का रास्ता तैयार किया था, उस मांग को मुख्यमंत्री ने सदन में दिए गए जवाब में पूरा कर दिया। विपक्ष दूसरे दिन भी पूरी तरह आक्रमक रुख में रहा। सत्तापक्ष ने भी इस आक्रमक रुख को देखकर विपक्ष के सवालों के जवाब देकर विपक्ष को रक्षात्मक मुद्रा में खड़े करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी। जब विपक्ष, सत्तापक्ष से सहमत नहीं हुआ तो उसने बर्हिगमन का रास्ता अख्तियार कर लिया।
स्कूल शिक्षा बोर्ड फर्जीवाड़े के नियम 130 के तहत शुरू हुई चर्चा में विपक्ष का आरोप था कि इस फर्जीवाड़े में सिर्फ छोटे-मोटे लोगों की गिरफ्तारी कर ही सरकार अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर रही है। इस चर्चा में विपक्ष के सदस्यों की यही मुख्य मांग थी कि बोर्ड के अध्यक्ष व सचिव पर कोई भी विशेष कार्रवाई नहीं की गई, जबकि इस मामले में उनका उत्तरदायित्व भी बनता था। प्रतिपक्ष की नेता विद्या स्टोक्स ने तो यहां तक भी कहा कि अगर सचिव व अध्यक्ष के होते हुए स्कूल शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली पर इतनी आंच आ जाए तो इन पदों का क्या लाभ? उन्होंने यह भी दलील दी कि अगर अपने अधिकारों का ही प्रयोग नहीं किया और अगर पढ़े-लिखे लोग भी अपनी आंखे मूंद ले तो स्वभाविक है कि उस संस्थान पर कहीं न कहीं ऐसे धब्बे लग ही जाएंगे। विपक्ष के इन तीखे मुद्दों की बौछार सत्तापक्ष की ओर से जवाब दिया गया। लेकिन, जवाब के बीच ही विपक्ष बर्हिगमन कर गया जबकि सरकार का पक्ष था कि फर्जीवाड़े की भनक लगते ही बोर्ड अधिकारियों ने इसकी सूचना पुलिस को देकर इसमें संलिप्त मास्टर माइंड सहित कई दूसरे लोगों के दबोच लिया। सरकार का यह पक्ष था कि जब मास्टर माइंड के स्कूल को लेकर उच्च न्यायालय ने अपनी टिप्पणियां दर्ज की थी और उस समय इसे गंभीरता से लेकर जांच की जाती तो इतना बड़ाफर्जीवाड़ा होने से रूक सकता था। मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने भी इस मामले में अपनी इच्छाशक्ति दो टूक शब्दों में व्यक्त कर दी कि अगर शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष ने अपने विवेकाधीन शक्तियों से अधिक छात्रों को प्रवेश पत्रों में विलंब के कारण अनुमति दी हो और या फिर किसी अधिकारी ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया होगा तो इसकी जांच करवाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस मामले को लेकर जितनी गंभीरता दिखाई, उससे यही आभास मिला कि स्कूल शिक्षा बोर्ड के लगे इस कलंक को प्रदेश सरकार धोने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखेगी(राकेश पठानिया,दैनिक जागरण संवाददाता,धर्मशाला,7.12.2010)।
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