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17 दिसंबर 2010

‘बांग्लादेश की आजादी’ पर झूठ का पुलिंदा पढ़ रहे पाकिस्तानी छात्र

भारत विरोधी भावनाओं को जिंदा रखने के लिए पाकिस्तान ऐतिहासिक और जगजाहिर तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने से बाज नहीं आ रहा है। वहां के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट छात्रों को 1971 में बांग्लादेश की आजादी की जो कहानी पढ़ाई जा रही है, उसमें भारत को साजिश का सूत्रधार बताया गया है। इन किताबों में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों और तत्कालीन सरकार के उस अड़ियल रवैये का कोई जिक्र नहीं है जिसने पाकिस्तान के विभाजन की नींव रखी।

अलग होने को भारत की साजिश बताया

चौंकाने वाली बात है कि यह स्कूली पाठ्यक्रम हमूद-उर-रहमान आयोग के तथ्यों पर आधारित है जिसे 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की पराजय की वजहों का पता लगाने के लिए गठित किया गया था। हालांकि इस आयोग के तथ्य कभी सार्वजनिक नहीं किए गए। पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ के अनुसार इस पाठ्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो या फिर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अड़ियल रवैये का कोई जिक्र नहीं किया जाता जिन्होंने पूर्वी पाकिस्तान के नेताओं की जायज मांगों को भी ठुकरा दिया। इस पुस्तक में पूरी साजिश का सूत्रधार भारत और पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) के हिंदू अध्यापकों को करार दिया गया है। पुस्तक के मुताबिक, ‘उस वक्त पूर्वी पाकिस्तान में कई हिंदू भारत के लिए जासूसी कर रहे थे। रूस पाकिस्तान के खिलाफ था और उसने भारत का साथ दिया। अमेरिका भी पूर्वी पाकिस्तान को एक अलग देश के रूप में देखना चाहता था।’ इसमें पाकिस्तानी सेना द्वारा मुक्ति वाहिनी के सदस्यों के साथ दुष्कर्म, साजिशन हत्याओं और बंगाली भाषी लोगों के नरसंहार का अंश मात्र भी नहीं है। 

अखबारी रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के तमाम इतिहासकारों और विद्वानों ने पाठ्यक्रम में बदलाव की मांग की है मगर सरकार चुप्पी साधे बैठी है। डॉन की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि कैसे तत्कालीन राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने अवामी लीग के मुजीबर रहमान के साथ सत्ता में साझेदारी से इनकार कर दिया। पाकिस्तान के टीचर्स डेवलपमेंट सेंटर के निदेशक अब्बास हुसैन ने इसे मजाक बताया है। प्रख्यात विद्वान परवेज हुदभाय ने कहा, 1971 के करीब चालीस साल बाद, भारत और बांग्लादेश में तमाम मतभेद उभरे हैं लेकिन यह कहीं भी नहीं झलकता कि वह पाकिस्तान में दोबारा शामिल होना चाहता है। उन्होंने कहा, स्कूली बच्चों को बताया जाना चाहिए क्यों उस वक्त पूर्वी पाकिस्तान के लोग शोषित महसूस कर रहे थे और आजादी के लिए संघर्ष कर रहे थे(अमर उजाला,16.12.2010)।

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