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02 दिसंबर 2010

गरीबों का डॉक्टर बनने का सपना होगा पूरा

जल्दी ही प्राइवेट फैक्टि्रयों और कंपनियों में 15 हजार से कम वेतन पर काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों के बच्चे भी डॉक्टर बनने का सपना पूरा कर पाएंगे। श्रम और रोजगार मंत्रालय इनके लिए देश भर में बड़ी तदाद में मेडिकल कॉलेज खोलने जा रहा है। इन कॉलेजों में ऐसे बच्चों के लिए दस फीसदी सीटें आरक्षित होंगी। इनमें से अधिकांश कॉलेज इस समय देश के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआइ) के अस्पतालों की ढांचागत सुविधाओं का इस्तेमाल करते हुए बनाए जा रहे हैं। श्रम और रोजगार राज्य मंत्री हरीश रावत ने दैनिक जागरण बातचीत में बताया कि उनका मंत्रालय 18 एमबीबीएस, 12 पीजी मेडिकल कॉलेज, 10 डेंटल कॉलेज, एक नर्सिग कॉलेज और एक पैरामेडिकल कॉलेज खोल रहा है। इनमें से दिल्ली और चेन्नई के पीजी मेडिकल कॉलेज और दिल्ली के डेंटल कॉलेज को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) और डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीआइ) की इजाजत मिल चुकी है। जबकि अन्य का काम तेजी से चल रहा है। एमबीबीएस सीटों में से दस फीसदी निजी क्षेत्र के उन कर्मचारियों के बच्चों के लिए सुरक्षित रखी गई हैं जो कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआइ) सेवा के तहत आते हैं। निजी क्षेत्र में 15 हजार से कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को सरकार ईएसआइ अस्पतालों में इलाज की सुविधा देती है। रावत के मुताबिक ईएसआइ के तहत शुरू हो रहे इन मेडिकल कॉलेजों में गरीब कर्मचारियों को दाखिले के समय साढ़े सात लाख की फीस भी देनी जरूरी नहीं होगी। वे सिर्फ डिग्री हासिल करने के बाद ईएसआइ को अपनी सेवा देने का बांड भर कर पढ़ाई पूरी कर सकते हैं। ये मेडिकल कॉलेज जिन शहरों में शुरू होने हैं, उनमें पटना (बिहार), फरीदाबाद (हरियाणा), मंडी (हिमाचल प्रदेश), बसई दारापुर (दिल्ली), हरिद्वार (उत्तराखंड), इंदौर (मध्य प्रदेश) और भुवनेश्वर (उड़ीसा) शामिल हैं। जबकि दस डेंटल कॉलेजों में से एक उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित पांडवनगर में बनाया जाना है(मुकेश केजरीवाल,दैनिक जागरण,2.12.2010)।

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