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02 दिसंबर 2010

हरियाणाःएचसीएस भर्ती धांधली में जांच कमेटी पर फैसला सुरक्षित

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने वर्ष 2002 में हुई 65 एचसीएस अधिकारियों की भर्तियों में धांधली के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले की जांच किसी कमेटी या किसी एजेंसी से करवाने के फैसले पर अपना आदेश 16 दिसंबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की वह कापी भी रखी गई, जिसमें कोर्ट ने भर्ती के समय के हरियाणा लोक सेवा आयोग के सदस्यों को हटाने के आदेश जारी किए थे। इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों को कहा था कि हाईकोर्ट इस मामले की जांच एक निष्पक्ष एजेंसी से करवाना चाहता है इसलिए सभी पक्ष जांच एजेंसी के स्वरूप के संबंध में कोर्ट को सलाह दें। कोर्ट ने कहा था कि अगर अगली तिथि तक कोई जवाब नहीं दे पाए तो कोर्ट स्वयं इस पर फैसला लेगा। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने इस मामले की विजिलेंस व फोरेंसिक जांच का अध्ययन कर कहा कि इस परीक्षा में गंभीर धांधली हुई है। बुधवार को इस मामले में जांच स्तर पर पक्षों में सहमति नजर न आने पर कोर्ट ने इस मामले में फैसला 16 दिसंबर के लिए सुरक्षित रख लिया। उत्तर पुस्तिका में मिली थी गड़बड़ी इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने कुछ उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में गड़बड़ी पाई थी। जांच पाया था कि एक उम्मीदवार ने केवल चार सवाल हल किए थे, जबकि उसे पांच सवालों के अंक दिए गए थे। यह उत्तर पुस्तिका पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के राजनैतिक सलाहकार रहे शेर सिंह बड़शामी के पुत्र कुलधीर सिंह की थी। इस उत्तरपुस्तिका में इतिहास के पेपर में मैप और एक अन्य अनिवार्य सवाल का जवाब भी नहीं दिया गया था। इसके बावजूद उसे पूरे अंक दिए गए थे। मामले में बहस के हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील मोहन जैन ने कोर्ट को बताया था कि जिस उम्मीदवार ने इस परीक्षा में 536 से ज्यादा अंक लिए थे, उसे साक्षात्कार में कम अंक दिए गए है। ऐसे ही एक मामले में करनाल के अतिरिक्त जिला जज राम सिंह की पत्नी रंजीत कौर जो हरियाणा के एक आईएएस अधिकारी हरबख्स सिंह की बहन है, उसने लिखित परीक्षा में 493 अंक लिए थे, उसे साक्षात्कार में 96 अंक मिले दिए गए थे। एचसीएस में चयन के लिए 583 अंक लेना जरूरी था। एक अन्य उम्मीदवार शैलेन्द्र सिंह ने लिखित परीक्षा में 565 अंक लिए थे उसे साक्षात्कार में केवल 17 अंक दिए गए, जिस कारण उसका चयन एचसीएस में नहीं हो पाया(दैनिक जागरण,चंडीगढ़,2.12.2010)।

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