आंदोलन कर रहे गुर्जरों को तगड़ा झटका देते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय ने बुधवार को इस बात को बरकरार रखा कि समुदाय के सदस्यों को सरकारी नौकरियों में कोई विशेष आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति महेश भगवती की खंडपीठ ने कहा कि गुर्जरों को विशेष आरक्षण नहीं दिया जा सकता और 2008 के एक अधिनियम में इस बारे में कोई पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं, जो आरक्षण को न्यायसंगत ठहरा सकें।
न्यायाधीशों ने कहा कि इसलिए इन्हें आरक्षण देने का कोई भी कदम किसी तरह लागू नहीं किया जा सकता। अदालत ने प्रदेश सरकार को आदेश दिया कि वह गुर्जरों, रायका, रायबारी और गाड़िया लुहार समुदाय के लोगों की शिक्षा और सरकारी नौकरियों में पिछड़ापन साबित करने का काम एक साल के भीतर पूरा करे।
प्रदेश के गुर्जर नौकरियों में आरक्षण समेत अपनी मांगों को लेकर दो दिन से आंदोलन कर रहे हैं। अशोक गहलोत सरकार ने कहा था कि वह इस गतिरोध को खत्म करने के उद्देश्य से बातचीत के लिए तैयार है। अदालत ने इसके पहले आरक्षण पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि यह 50 फीसदी की सीमा से उपर जा रहा है।
अपना आंदोलन तेज करने की धमकी देते हुए गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने कल कहा था, जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, हम पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। गुर्जरों के आंदोलन के कारण भरतपुर जिले में रेल और सड़क यातायात प्रभावित हो रहा है।
नवभारत टाइम्स डॉटकॉम की ख़बरः
आंदोलन कर रहे गुज्जरों को एक झटका देते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने बुधवार को इस बात को बरकरार रखा कि समुदाय के सदस्यों को सरकारी नौकरियों में कोई विशेष आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
चीफ जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस महेश भगवती की बेंच ने कहा कि गुज्जरों को विशेष आरक्षण नहीं दिया जा सकता और 2008 के एक अधिनियम में इस बारे में कोई पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं, जो आरक्षण को न्यायसंगत ठहरा सके।
न्यायाधीशों ने कहा कि इसलिए इन्हें आरक्षण देने का कोई भी कदम किसी तरह लागू नहीं किया जा सकता। अदालत ने प्रदेश सरकार को आदेश दिया कि वह गुज्जरों, रायका, रायबारी और गाडि़या लुहार समुदाय के लोगों की शिक्षा और सरकारी नौकरियों में पिछड़ापन साबित करने का काम एक साल के भीतर पूरा करे।
प्रदेश के गुज्जर नौकरियों में आरक्षण समेत अपनी मांगों को लेकर दो दिन से आंदोलन कर रहे हैं। अशोक गहलोत सरकार ने कहा था कि वह इस गतिरोध को खत्म करने के उद्देश्य से बातचीत के लिए तैयार है।
अदालत ने इसके पहले आरक्षण पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि यह 50 फीसदी की सीमा से ऊपर जा रहा है। अपना आंदोलन तेज करने की धमकी देते हुए गुज्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने कल कहा था, तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, हम पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। गुज्जरों के आंदोलन के कारण भरतपुर जिले में रेल और सड़क यातायात प्रभावित हो रहा है।
भास्कर डॉटकॉम में गिरिराज अग्रवाल की रिपोर्टः
सरकारी नौकरियों में पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर पटरियों पर धरना दे रहे गुर्जरों को राजस्थान हाईकोर्ट ने करारा झटका दिया है। अदालत ने उनकी मांग नामंजूर कर दी है। गुर्जर अभी भी आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं। आरक्षण संघर्ष समिति ने गुर्जर समाज से दिल्ली में दूध की सप्लाई तुरंत रोकने का आह्वान किया है। बुधवार को पीलूपुरा और रसेरी गांव के समीप दिल्ली-मुंबई ट्रैक पर जमे गुर्जरों को जाट समुदाय ने भी अपना समर्थन दे दिया।
राजस्थान हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश अरूण मिश्र और न्यायाधीश महेश भगवती की खण्डपीठ ने कहा कि गुर्जरों को विशेष आरक्षण नहीं दिया जा सकता। राज्य सरकार यह प्रमाणित नहीं कर पाई है कि गुर्जरों को किस आधार पर पांच फीसदी आरक्षण दिया जाए। अदालत ने गुर्जरों को दिया गया 1 फीसदी आरक्षण जारी रखने के आदेश दिए।
अदालत ने सरकार को एक साल के भीतर गुर्जर सहित तमाम जातियों के आंकड़े जमा करने और गुर्जरों की आर्थिक स्थिति का आंकलन कर रिपोर्ट सौंपने को भी कहा। पीठ ने कहा कि तमिलनाडु का 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण का फार्मूला यहां लागू नहीं हो सकता। याचिकाकर्ता जी शर्मा ने पहले अदालत में याचिका दाखिल कर आरक्षण को 50 फीसदी से ज्यादा होने पर आपत्ति की थी। इसी याचिका पर हाईकोर्ट ने आज फैसला सुनाया।
दिल्ली में दूध सप्लाई रोकने का आह्वान
राजस्थान गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष किरोड़ी सिंह बैंसला ने हाई कोर्ट के निर्णय के बाद गुर्जर समाज को कहा है कि वे दिल्ली में दूध की सप्लाई तुरंत रोक दें। उन्होंने राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे यातायात को भी जाम करने का एलान किया है। फैसला आने के बाद धरना स्थल से फोन पर बात करते हुए कर्नल बैंसला ने कहा कि सरकार ने गुर्जर समाज की पैरवी ठीक तरह से अदालत में नहीं की, जिस कारण समाज के साथ न्याय नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि गुर्जर समाज आंदोलन को और तेज करेगा।
बैंसला ने कहा कि वह राजस्थान सरकार की भेदभाव पूर्ण नीतियों के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखेंगे। उनका कहना है कि सरकार कुछ भी करे, उन्हें तो 5 प्रतिशत आरक्षण चाहिए। उन्होंने गुर्जरों की मांगों के संबंध में सरकार की ओर से किए गए प्रयासों की जानकारी देने के उद्देश्य से अखबारों में प्रकाशित विज्ञापन को भी छलावा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को बातचीत करनी है तो ट्रैक पर आएं। गृहमंत्री शांति धारीवाल का कहना है कि हम वार्ता को तैयार हैं, पर यह टेबल पर होगी।
पीलूपुरा में रेलवे ट्रैक पर गुर्जरों की संख्या बढ़ती जा रही है। पीलूपुरा में जिस रेलवे ट्रैक पर आंदोलनकारी गुर्जर बैठे हैं, वहां कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। इसके बावजूद गुर्जर अलाव जला कर ट्रैक पर जमे हुए हैं।
जाटों ने दिया समर्थन
राष्ट्रीय जाट आरक्षण समिति ने भी गुर्जरों के आंदोलन को समर्थन दिया है। मंगलवार को पीलूपुरा में समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक की ओर से भेजे गए प्रतिनिधिमंडल ने इसकी घोषणा की। उधर, इस समिति के हरियाणा में प्रदेशाध्यक्ष हवासिंह सागवा ने भी आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाने की बात कही है।
छौंकड़ा पुलिस चौकी पर कब्जा जमाया
गुर्जरों ने मंगलवार को बयाना की छौंकड़ा पुलिस चौकी पर कब्जा कर लिया। हालांकि पुलिस का कहना है कि यह चौकी सोमवार को ही खाली कर दी गई थी। गुर्जर चौकी के कमरों और छत पर बैठे हैं।
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