उत्तराखण्ड राज्य मंत्रिमण्डल की बैठक में आज उत्तराखण्ड में संस्कृत शिक्षा परिषद् के गठन को मंजूरी दे दी गई। इस प्रकार यह राज्य संस्कृत को अपनाने वाला पहला राज्य बन गया। इस बैठक में ऋषिकेश व हरिद्वार को संस्कृत नगरी के रूप में विकसित करने का भी निर्णय हुआ है। इसके अलावा राज्य में सभी नाम पट्टों एवं सरकारी बोर्डों को संस्कृत में भी लिखवाए जाने को अनिवार्य कर दिया गया।
इस कैबिनेट की बैठक में यह भी फैसला हुआ कि कुमाऊं व ग़ढ़वाल मण्डल में एक-एक गांव को संस्कृत गांव के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा कई विभागों की सेवा नियमावली एवं ढांचों को भी स्वीकृति प्रदान की गई है(नई दुनिया,दिल्ली,22.12.2010)।
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