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02 दिसंबर 2010

पश्चिम बंगालःहिंदी में लिखे आवेदन नही लिए जाते,मांगा जाता है अनुवाद

राज्य के हावड़ा जिले के तमाम सरकारी विभागों में प्रतिदिन हिंदी भाषा की उपेक्षा की जाती है। अगर कोई व्यक्ति बांग्ला अथवा अंग्रेजी नही जानता है तो हिंदी में लिखे गये आवेदन पत्र को स्वीकार नही किया जाता है। जनता युवा मोर्चा के नेता उमेश राय ने बताया कि पुलिस विभाग में आलाअधिकारी हिंदी भाषी होने के बावजूद उनके सहायक हिंदी में लिखे आवेदन पत्र लेने से इंकार कर देते हैं। वे खुद किसी वकील को बता का यह सलाह देते हैं कि आवेदन पत्र को अनुवाद कर लाया जाय। इतना ही नही हिंदी में आवेदन पत्र लिख कर थाने में गये लोगों को पुलिस उपेक्षित समझती है। राष्ट्र भाषा होने के बावजूद कोई भी विभाग इसकी कदर नही करता। उन्होंने बताया कि इससे पहले जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंप कर प्रत्येक विभाग में हिंदी में लिखे गये आवेदन पत्र को स्वीकार करने अथवा बांग्ला के साथ अंग्रेजी की तरह हिंदी को भी शामिल करना चाहिए। ललन यादव ने बताया कि राशन दुकान से लेकर अस्पताल, पुलिस स्टेशन अथवा शिक्षा विभाग, रोजगार कार्यालयों में हिंदी में कुछ भी लिख कर देने से उसे स्वीकार नही किया जाता है। खास कर लोगों को पुलिस थानों में भाषाई परेशानियां काफी अधिक होती है। जबकि अजीम खान ने बताया कि आजादी के करीब छह दशक बाद भी हिंदी को उचित स्थान नही मिल सका है। हिंदी भाषा-भाषी लोगों को किसी भी कार्यालय मे उपेक्षा की नजर से देखा जाता है। हिंदी में आवेदन पत्र ले जाने पर मौजूद सहायक कई प्रकार के सवाल करने के बाद लौटा देते हैं। इस संबंध में पूछे जाने पर मनोज सिंह ने बताया कि इस वर्ष जिला पुलिस प्रशासन में पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं उपाधीक्षक हिंदी भाषी होने के बावजूद उनके सहायकों ने हिंदी में आवेदन और शिकायत पत्र को स्वीकार नही किया गया। लोगों को सबसे अधिक परेशानी पुलिस थानों में होती है। इसके अलावा बिजली का कनेक्शन लेने के लिए भी बांग्ला अथवा अंग्रेजी में आवेदन पत्र लिख कर मांगाजाता है। भोला नाथ मिश्र ने बताया कि इस राज्य में हिंदी भाषियों की तरह हिंदी भी उपेक्षित है। देश के प्राय: प्रत्येक राज्य में स्थानीय भाषा के साथ राष्ट्रीय भाषा को भी तरजीह दी जाती है। इस राज्य में आज तक ना हिंदी भाषा का सरकारी स्तर पर विकास हुआ और ना इस भाषा से जुड़े लोगों का ही। श्री मिश्र ने बताया कि प्रत्येक विभाग के सामने बांग्ला में आवेदन पत्र लिखने वाले बैठे मिल जाते हैं। दस रुपये लेकर आवेदन पत्र लिखते हैं। इधर गोपाल चौधरी ने बताया कि हिंदी भाषाई लोगों के साथ सरकार उचित व्यवहार नही कर रही है। इतने लंबे शासन के दौरान आज तक राज्य में हिंदी भाषा को सम्मान नही मिल सका है। गौरतलब है कि भाषा के विकास से ही समाज का विकास होता है। भाषा पिछड़ी तो इस भाषा को जानने वाले भी पिछड़ गये(दैनिक जागरण,हावड़ा,2.12.2010)।

1 टिप्पणी:

  1. भाई ये हिन्दोस्तान है इस मे सब कुछ सम्भव है और चलता है। कितनी दुखद स्थिती है। आभार।

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