मानवीय भावनाएं, व्यवहार और दृष्टिकोण किसी व्यक्ति के काम को बड़े स्तर पर प्रभावित करते हैं। काम को गंभीरता से लेना सुरक्षित पेशेवर भविष्य और अपनी संतुष्टि के लिए बेहद जरूरी हो जाता है। हालांकि कई बार स्थितियां आपके पक्ष में नहीं होती जिसके कारण हम अपने काम से पकड़ खोने लगते हैं। चाहे हमें अपना काम पसंद हो या नहीं, पर यदि काम कर रहे हैं तो पूरी गंभीरता से करना चाहिए। कभी-कभार इस संबंध में लापरवाही स्वीकृत हो सकती है, पर हर समय नहीं। खासतौर पर वर्ष के अंतिम दिनों में जब अप्रेजल का समय नजदीक होता है तब अपनी परफॉरमेंस के प्रति सकारात्मक रवैया अपनाना ही सबसे बेहतर रहता है। यही कारण है कि जो लोग पूरे वर्ष अच्छा काम करने में सफल नहीं रहते, वह अंतिम दिनों में अपनी कार्य आदतों में बदलाव करने के लिए तत्पर हो जाते हैं। यदि आप भी इस संबंध में प्रयास करने जा रहे हैं तो कार्यस्थल पर समय से पहले या जहां तक संभव हो समय पर पहुंचने का प्रयास करें। सौंपे गए लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास करें, कम से कम उसके नजदीक पहुंचने का प्रयास अवश्य करें।
काम की जिम्मेदारी लेना और उसे पूरा करने का प्रयास कार्यस्थल पर आपकी विश्वसनीयता को भी बढ़ाता है। साथ ही दूसरों में भी आपका कार्य सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न करता है। कार्यस्थल पर बड़ी जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिलता है। वहीं लंबे समय तक बरती गई लापरवाही से पेशेवर व्यक्ति के तौर पर आपकी साख कम होती है। कार्यस्थल पर अनावश्यक प्रश्नों की पूछताछ और आपकी सक्षमता पर भी प्रश्नचिह्न खड़े करती है। ऑफिस में अन्य कर्मियों के समक्ष आपकी छवि को बिगाड़ती है।
काम के प्रति आपकी गंभीरता का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि आपने काम कैसे पूरा किया है। अपना काम दूसरे से पूरा करवाना या फिर हमेशा अपनी जिम्मेदारियों से दूर भागना यह भम्र उत्पन्न कर सकता है कि आप स्मार्ट प्रबंधक हैं, पर यह जरूरी नहीं कि आपके सीनियर्स पर इसका सकारात्मक असर हो ही। यह भी संभव है कि वे आपको कई अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में शामिल करने से मना कर दें। कार्यस्थल पर आपकी आप छवि कैसी बनाना चाहते हैं, यह खुद सोचें(हिंदुस्तान,दिल्ली,28.11.2010)।
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