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03 दिसंबर 2010

झारखंडःपैरा-शिक्षकों का बढ़ा मानदेय

पारा शिक्षकों ने जब-जब आंदोलन किया है, तब-तब उनका मानदेय बढ़ा है। वर्ष 2004 से 2010 तक मानदेय चार बार बढ़वाया है। इस वर्ष 27 अगस्त से 21 अक्टूबर तक हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल के बाद एक बार फिर अपने मानदेय में एक हजार रुपए बढ़वाने पर शिक्षा मंत्री की सहमति प्राप्त कर ली है। इस पर अब तक सरकार की मुहर लगनी बाकी है।

कई श्रेणियों में बढ़ता गया मानदेय
यदि इस बार मानदेय बढ़ा तो मात्र छह वर्ष में छह गुणा बढ़ जाएगा। पारा शिक्षकों का चयन वर्ष 2002 में निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर किया गया था। चयन से लेकर 30 अक्टूबर 2004 तक सभी प्रकार के पारा शिक्षकों को प्रतिमाह एक हजार रुपए मानदेय मिलते थे। यह भारत सरकार से प्राप्त दिशा-निर्देश के आलोक में था। नवंबर 2004 से दो तरह के मानदेय मिलने लगे। जो अप्रशिक्षित थे उन्हें दो हजार और जो प्रशिक्षित थे उन्हें 25 सौ रुपए मिलने लगे।

27 नवंबर 2006 से पारा शिक्षकों को तीन तरह का मानदेय मिलने लगा। जो इंटर अप्रशिक्षित थे उन्हें 25 सौ, जो इंटर प्रशिक्षित लेकिन स्नातक अप्रशिक्षित थे, उन्हें तीन हजार और जो स्नातक प्रशिक्षित थे उन्हें तीन हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलने लगा। इसके बाद 12 अक्टूबर 2009 से मानदेय फिर बढ़ा दिया गया। जो इंटर अप्रशिक्षित थे उन्हें चार हजार, इंटर प्रशिक्षित और स्नातक अप्रशिक्षित को 45 सौ और जो स्नातक प्रशिक्षित थे, उनका मानदेय बढ़ा कर पांच हजार रुपए कर दिया गया।

क्यों हुआ था पारा शिक्षकों का चयन

राज्य गठन के बाद मानव संसाधन विकास विभाग, झारखंड सरकार के संकल्प संख्या प्राशिनि/1562/02—1018 दिनांक 04.08.2002 द्वारा निर्णय लिया गया कि वैसे गांव और टोले जहां एक किमी की दूरी पर प्राथमिक विद्यालय नहीं है, वहां ग्राम शिक्षा अभियान के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय व ईजीएस केंद्र स्थापित किया जाएगा। विद्यालय स्थापना के लिए ग्राम शिक्षा समिति का गठन किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों को सम्मिलित किया गया। 

ग्राम शिक्षा समिति द्वारा स्थापित विद्यालयों में पारा शिक्षकों को चयनित करने का निर्देश मिला। इसमें स्थानीय युवक और युवतियों को शिक्षक के रूप में चयनित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसमें ग्राम शिक्षा अभियान के अंतर्गत स्थापित अभियान विद्यालयों को भी शिक्षा गारंटी केंद्र के रूप में समाहित किया गया। सर्व शिक्षा अभियान के तहत शिक्षा गारंटी केंद्रों को प्राथमिक और प्राथमिक विद्यालयों को मध्य में उत्क्रमित किया गया। इसमें निर्धारित मानक के अनुरूप पारा शिक्षकों का चयन किया गया(राजीव गोस्वामी,दैनिक भास्कर,रांची,3.12.2010)।

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