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03 दिसंबर 2010

दिल्लीःप्राइवेट स्कूलों को पसंद नहीं ड्रॉ से दाखिले

नर्सरी में दाखिले की प्रक्रिया को लेकर प्राइवेट स्कूलों के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से मुलाकात की। प्राइवेट स्कूलों की अलग-अलग संस्थाओं और प्रिंसिपलों ने एडमिशन के मौजूदा फॉर्म्युले को ही जारी रखने की वकालत की। स्कूलों ने साफ कहा कि 100 पॉइंट फॉर्म्युला ही श्रेष्ठ है और ड्रॉ सिस्टम को लागू नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही मैनेजमेंट कोटा बरकरार रखने की गुहार भी लगाई गई। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री ने स्कूलों से अपने सुझाव लिखित रूप से देने को कहा और आश्वासन दिया कि एडमिशन गाइड लाइंस तैयार करते वक्त उनके सुझावों पर गौर किया जाएगा।

बहरहाल, राइट टु एजुकेशन एक्ट के तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने दिल्ली सरकार को जो गाइड लाइंस भेजी हैं, उसमें ड्रॉ सिस्टम लागू करने को कहा गया है लेकिन अब स्कूल इस सिस्टम के खिलाफ आ गए हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि नर्सरी एडमिशन में कैटिगरी को लेकर स्थिति उलझती ही जा रही है और सरकार के लिए भी गाइड लाइंस तैयार करना बड़ी चुनौती बन गया है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल फेडरेशन ऑफ पब्लिक स्कूल के चेयरमैन आर. पी. मलिक ने बताया कि अगर ड्रॉ सिस्टम से एडमिशन शुरू कर दिए जाएंगे तो इससे स्कूलों व अभिभावकों की परेशानी में इजाफा होगा। स्कूल किस-किस कैटिगरी का ड्रॉ निकालेंगे, साथ ही एडमिशन प्रक्रिया भाग्य पर ही निर्भर हो जाएगी। इससे बेहतर है कि मौजूदा समय में जो पॉइंट सिस्टम चल रहा है, उससे स्कूलों को भी अपनी जरूरत के मुताबिक फॉर्म्युला बनाने का अधिकार होता है, साथ ही अभिभावकों को भी यह पता चलता है कि उनके बच्चे का एडमिशन किस आधार पर हुआ और किस आधार पर नहीं हुआ? उन्होंने कहा कि स्कूल जल्द ही अपने सुझाव सरकार को भेज देंगे।

मुख्यमंत्री से हुई बातचीत के बारे में बताते हुए महावीर सीनियर मॉडल स्कूल के प्रिंसिपल एस. एल. जैन ने कहा कि स्कूलों ने बताया कि 100 पॉइंट सिस्टम को हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद दिल्ली सरकार ने ही तैयार किया था और इसे ड्रॉ में तब्दील नहीं किया जाना चाहिए। जैन के मुताबिक स्कूलों ने यह भी मांग रखी कि मैनेजमेंट कोटा बरकरार रखा जाना चाहिए। अभी स्कूलों में 15 से 20 प्रतिशत तक सीटें मैनेजमेंट कोटे के तहत आरक्षित होती हैं और इस कोटे को खत्म किए जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। प्रतिनिधिमंडल में प्राइवेट स्कूलों की एक्शन कमिटी के सदस्य भी शामिल थे। उधर प्राइवेट स्कूलों की एक दूसरी महत्वपूर्ण संस्था नैशनल प्रोग्रेसिव स्कूल कॉन्फ्रेंस (एनपीएससी) ने भी गुरुवार को एक बैठक बुलाई थी, जिसमें स्कूलों के प्रिंसिपलों ने कहा कि एडमिशन क्राइटेरिया बनाने की उन्हें छूट मिलनी चाहिए और मैनेजमेंट कोटे को बरकरार रखा जाना चाहिए। एनपीएससी ने भी अपने सुझाव तैयार कर लिए हैं, जिनमें इन दोनों मसलों को शामिल किया गया है(नवभारत टाइम्स,दिल्ली,3.12.2010)।

उधऱ,दैनिक जागरण की रिपोर्ट है कि नई दिल्ली स्कूलों में मैनेजमेंट कोटा खत्म करने के अपने फैसले पर दिल्ली सरकार फिर से विचार कर सकती है। सरकार के फैसले के विरोध में बृहस्पतिवार को स्कूलों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से मिला। मुख्यमंत्री ने फैसले पर फिर से विचार करने के लिए न केवल भरोसा दिया, बल्कि उनसे इस मुद्दे पर रिपोर्ट भी मांगी है। इस साल शिक्षा के अधिकार बिल के तहत स्कूलों में लागू होने वाले 25 फीसदी आरक्षण के कारण कई व्यवस्थाओं में परिर्वतन करने की प्रक्रिया जारी है। इसके तहत स्कूलों में मैनेजमेंट कोटा भी खत्म कर दिया गया था। इस पर स्कूलों का विरोध है क्योंकि मैनेजमेंट कोटा स्कूलों के लिए आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए एक बड़ा जरिया था। दिल्ली पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष आर.सी. जैन ने कहा कि स्कूलों के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री से मिले और उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत करवाया गया। मुख्यमंत्री ने इस पर स्कूलों से रिपोर्ट मांगी है ताकि उस पर विचार किया जा सके। पूरी उम्मीद है कि कोटा फिर से बहाल हो जाएगा। दूसरी ओर राजधानी में नर्सरी कक्षा में दाखिला पहले की तरह प्वाइंट सिस्टम से ही हो, इस बाबत स्कूलों ने सुझाव दिल्ली सरकार को बृहस्पतिवार शाम 5 बजे तक सौंप दिया।

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