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07 दिसंबर 2010

उत्तराखंड में स्वास्थ्य विवि स्थापना की कवायद शुरू

प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा विभाग की तमन्ना पूरी हुई तो स्वास्थ्य विश्वविद्यालय (हेल्थ यूनिवर्सिटी) जल्द अस्तित्व में आएगा। इससे न केवल चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और शोध के क्षेत्र में राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नया मुकाम पाने में मदद मिलेगी बल्कि मेडिकल कालेजों को संबद्धता को लेकर राहत मिलना तय है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने स्वास्थ्य विश्वविद्यालय की स्थापना की मंशा जाहिर की है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री बलवंत सिंह भौंर्याल के निर्देश पर विभाग इसकी तैयारी में जुटा है। सूबे में विवि, चिकित्सा महाविद्यालय, नर्सिग कालेज समेत चिकित्सा शिक्षा बेहतर बनाने को कई योजनाएं शुरू की गई हैं। हालांकि इसमें जमीन नहीं मिलने से योजनाओं के धरातल पर उतरने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। स्वास्थ्य विवि की स्थापना के मामले में मंत्री ने नैनीताल के गेठिया में स्वास्थ्य विभाग की जमीन उपलब्ध होने का उल्लेख कर राह आसान कर दी है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री के मुताबिक, निकट भविष्य में पांच मेडिकल कालेजों की संबद्धता और मान्यता के मद्देनजर स्वास्थ्य विवि की जरूरत महसूस की जा रही है। दरअसल, सूबे के दो सरकारी, एक निजी मेडिकल कालेज समेत कई पैरामेडिकल कालेजों की संबद्धता और मान्यता चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र की विशेषज्ञ संस्था के बजाए अन्य विवि से है। उत्तराखंड को एजुकेशन हब के तौर पर विकसित करने की योजना के तहत स्वास्थ्य विवि को अहम माना जा रहा है। इससे चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता की निगरानी के साथ ही इस क्षेत्र में शोध को भी बढ़ावा मिलेगा। यह बात दीगर है कि नए विवि और कालेजों को लेकर सरकार जितनी तेजी से आगे बढ़ने की मंशा जता रही है, भूमि की उपलब्धता में पेच से अड़ंगा लग रहा है। प्रस्तावित दून मेडिकल कालेज की स्थापना में भी भूमि चयन का मामला बार-बार फंस रहा है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री भौंर्याल के मुताबिक, इस प्रकरण को जल्द निस्तारित किया जाएगा। स्वास्थ्य विवि के लिए भूमि की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। इस मामले में अब विभाग के प्रस्ताव का इंतजार है(दैनिक जागरण,देहरादून,7.12.2010)।

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