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02 दिसंबर 2010

अलीगढ़ःआखिर कोई क्यों पढ़े संस्कृत?

संस्कृत को आज के दौर में आउटडेटेड माना जाता है। जिले में तो इसकी यही हालत है। जिले के सात संस्कृत विद्यालयों में संस्कृत के विद्यार्थी महज 356 हैं। वहीं अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में यह तादाद 20 हजार से ज्यादा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिले में सात विद्यालय हैं। संस्कृत विद्यालयों में कक्षा छह से आठवीं तक की कक्षा को संयुक्त रूप से प्रथमा कहते हैं। नौवीं व दसवीं कक्षाएं मध्यमा में और कक्षा 11 व 12 उत्तमा में आती हैं। इनमें प्रथमा, मध्यमा और उत्तमा के लिए फार्म भरने की आखिरी तारीख 30 नवंबर थी। डीआईओएस दफ्तर में दर्ज रिकार्ड में आखिरी तारीख तक कुल 356 विद्यार्थी ही पंजीकृत हुए हैं। संस्कृत नहीं उर्दू संस्कृत विद्यालयों की तुलना में अंग्रेजी मीडियम स्कूलों की संख्या काफी अधिक है। पब्लिक स्कूल डेवलपमेंट सोसायटी के अधीन सभी प्रमुख विद्यालय आते हैं। सोसायटी के सचिव व अल-बरकात पब्लिक स्कूल के सचिव अहमद मतुजबा सिद्दीकी की मानें तो पब्लिक स्कूल में 20 हजार से ज्यादा विद्यार्थी हैं। इन स्कूलों में संस्कृत को तृतीय श्रेणी में रखा गया है, वह भी उर्दू के साथ विकल्प के तौर पर। 80 फीसदी से ज्यादा मां-बाप बच्चे के लिए तैयार करने के लिए उर्दू को चुनते हैं। संस्कृत आर्यो की भाषा है और हम सभी आर्य संतान हैं। आमजन को अपनी संस्कृति नहीं छोड़नी चाहिए। आखिर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी संस्कृत गुरुकुल के छात्र रहकर इतने बड़े पद पर रह चुके हैं। -आचार्य चेतन देव वैश्वानर, गार्गी संस्कृत गुरुकुल, भैयां चामड़(शिवओम पाठक,दैनिक जागरण,अलीगढ़,2.12.2010)

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