राज्य बिजली बोर्ड के 51 हजार अधिकारी-कर्मचारियों को बोर्ड की ही छह बिजली कंपनियों में भेजने का रास्ता खोल दिया गया है। इसके साथ ही बिजली बोर्ड के खात्मे की तैयारी तेज हो गई है। वर्तमान में इन कंपनियों में काम कर रहा अमला अब बोर्ड के बजाय इन्हीं कंपनियों का हो जाएगा,जबकि बोर्ड मुख्यालय जबलपुर में कार्यरत 90 फीसदी कर्मचारी पॉवर ट्रेडिंग कंपनी को सौंपे जा रहे हैं।
इस संबंध में बुधवार को आदेश जारी हो गया। केंद्रीय उर्जा मंत्रालय ने मप्र राज्य बिजली बोर्ड के समापन के लिए 31 दिसंबर 2010 तक का समय दिया था। सरकार ने केंद्र से तीन महीने की मोहलत और मांगी है। इस बीच कर्मचारियों को कंपनियों की सेवा में सौंपने का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसी सिलसिल में अमले को तीनों विद्युत वितरण कंपनियों (पूर्व, पश्चिम एवं मध्य) के अलावा जनरेटिंग, ट्रांसमीशन और पॉवर ट्रेडिंग कंपनी में भेजा जा रहा है।
इस आशय की खबर मुख्यालय पहुंचते ही वहां हड़कंप मच गया। सूत्रों के मुताबिक बोर्ड में तकरीबन डेढ़ सौ अधिकारी कर्मचारी ही रखे जाएंगे, अन्य को कंपनियों को सौंप दिया जाएगा। सरकार मप्र और छत्तीसगढ़ के बीच लटके बंटवारे के बाकी मामले निपटने तक बोर्ड का अस्तित्व रखना चाहती है।
किस कंपनी में जाएंगे कहां के कर्मचारी
जनरेटिंग कंपनी के 60 कर्मचारी जो दूसरी कंपनियों में कार्यरत हैं, जनरेटिंग कंपनी के ही कर्मचारी माने जाएंगे। बोर्ड की सामान्य सेवाओं जैसे खरीदी विभाग, कंप्यूटर विभाग के कार्यालयों में काम कर रहे कर्मचारी पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में भेजे गए हैं।
बोर्ड मुख्यालय स्थित डायरेक्टर फायनेंस और उनके अधीन कार्यालय,अस्पताल, वाहन शाखा,एसई सिविल मुख्यालय, डायरेक्टर सतर्कता एवं सुरक्षा, विभाग, केंद्रीय खेल एवं सांस्कृतिक समिति, बोर्ड का भोपाल स्थित संपर्क कार्यालय एवं रेसीडेंट सीई कार्यालय के अमले को पॉवर ट्रेडिंग कंपनी को सौंपा गया है,जबकि लोड डिस्पेच सेंटर का अमला ट्रांसमीशन कंपनी, सिविल सर्कल मंडलेश्वर का कमला जनरेटिंग कंपनी में जाएगा।
बोर्ड के कार्मिक विभाग का अमला जिसमें औद्योगिक संबंध अधिकारी,जनसंपर्क अधिकारी,वरिष्ठ विधि अधिकारी कार्यालय शामिल हैं,को जबलपुर स्थित चार कंपनियों जनरेटिंग,ट्रांसमीशन,पूर्व क्षेत्र वितरण कंपनी और पॉवर ट्रेडिंग कंपनी में बांट दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ में बोर्ड खत्म
मप्र सरकार बंटवारे के मसलों के निपटने तक राज्य बिजली बोर्ड को बरकरार रखना चाहती है, जबकि छत्तीसगढ़ ने एक जनवरी 09 को बोर्ड भंग कर छह कंपनियां बना ली थीं। इनमें से एक होल्डिंग कंपनी है, जो संपत्ति के बंटवारे आदि के मामले देखती है।
इतना ही नहीं सेंट्रल एकाउंट यूनिट के अमले को सभी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया है। मप्र में बिजली बोर्ड को बरकरार रखते हुए 2005 में पांच कंपनियां बनाई गईं। बाद में छठवीं कंपनी पॉवर ट्रेडिंग कंपनी भी गठित कर दी गई।
ये होंगी बोर्ड से ट्रांसफर की शर्तें
30 नंवबर 2010 से छह कंपनियों में कार्यरत अमले की सेवाएं प्रोविजनल आ?ार पर ट्रांसफर मानी जाएंगी
प्रोविजनल ट्रांसफर होने के बाद भी बोर्ड किसी कर्मचारी अधिकारी को अ?य किसी कंपनी में प्रतिनियुक्ति पर काम सौंप सकता है।
राज्य सरकार के अगले आदेश तक सभी कर्मचारी अधिकारियों की पदोन्नति समेत सभी सर्विस मामलों में बोर्ड कार्यवाही करता रहेगा।
कर्मचारी अधिकारी सेवाओं के प्रोविजनल ट्रांसफर के बारे में 45 दिन के भीतर आवेदन कर सकेंगे, इसके लिए राज्य शासन ने शीर्ष समिति बनाई है।
इसकी मदद के लिए कार्यकारिणी समिति बनेगी।
:कर्मचारी सुनवाई के लिए कर्मचारी प्रतिनिधि संघ या संगठन की मदद ले सकेंगे।
:सेवाओं के प्रोविजनल ट्रांसफर के बाद शीर्ष समिति की सिफारिश पर रास??य सरकार स्थाई ट्रांसफर का आदेश जारी करेगी।
:स्थाई ट्रांसफर के बाद भी किसी कर्मचारी अधिकारी को निश्चित समय अवधि के लिए प्रतिनियुक्ति पर आए कंपनी में भेजा जा सकेंगे।
:बोर्ड में वर्तमान में किए जा रहे कार्यो में लगा अमला काम करता रहेगा, उसे प्रतिनियुक्ति पर माना जाएगा(दैनिक भास्कर,भोपाल,2.12.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।