केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के स्कूलों में इस सत्र से दसवीं के छात्रों को परीक्षा देने के लिए दो विकल्प दिए गए हैं। तिमाही, छमाही एवं वार्षिक परीक्षा के लिए वे बोर्ड और लोकल यानी स्कूल बेस परीक्षा का चयन कर सकते हैं। फिलहाल दोनों तरह की परीक्षा का आयोजन करने स्कूल प्रबंधन के पसीने छूट रहे हैं।
शिक्षकों की डच्यूटी भी दोनों ही परीक्षाओं में लगने की वजह से वे भी नाराज हैं। कुछ स्कूलों के छात्रों ने शिकायत की है कि स्कूल के शिक्षक सभी को एक ही तरह की परीक्षा चुनने के लिए दबाव डाल रहे हैं ताकि उन्हें केवल एक ही परीक्षा का आयोजन करना पड़े।
बीते माह होलीक्रास स्कूल कांपा में इस विषय को लेकर काफी बवाल भी हुआ था। कुछ छात्र संगठनों ने इसके विरोध में स्कूल में प्रदर्शन भी किया था।
राजधानी के लगभग सभी बड़े सीबीएसई स्कूल फिलहाल इस दबाव से इनकार कर रहे हैं। स्कूलों के प्राचार्यो का कहना है कि सब कुछ छात्रों पर छोड़ दिया गया है। छात्रों की मर्जी के अनुसार ही उन्हें परीक्षा में शामिल होने की छूट दी जा रही है।
फिलहाल यह व्यवस्था केवल 10वीं के छात्रों के लिए ही है। 11वीं और 12वीं के छात्रों को सीबीएसई बोर्ड के एग्जाम में ही शामिल होना होगा।
क्यों पड़ी जरूरत
प्राचार्यो की मानें तो दोनों ही परीक्षाओं में कोई खास अंतर नहीं है। सभी विषयों का सिलेबस एक समान होने के साथ ही परीक्षा का पैटर्न भी एक ही है। इसके अलावा दोनों ही परीक्षाओं के मूल्यांकन का तरीका भी एक ही होगा।
दो विकल्प की सुविधा इसलिए दी गई है ताकि 10वीं के बाद स्कूल बदलने वाले छात्रों को 11वीं में एडमिशन लेने में दिक्कत न हो। वे किसी भी बोर्ड में प्रवेश ले सकते हैं। ट्रांसफर केस में भी यह विकल्प छात्रों की मदद करेगा।
"छात्रों का स्ट्रेस खत्म करने के लिए ही सीबीएसई की ओर से यह व्यवस्था की गई है। छात्र खुले तौर पर किसी भी विकल्प का चयन कर सकते हैं"-प्रतिमा राजगौर प्राचार्य ज्ञान गंगा एकेडमी
"छात्रों की सुविधा के लिए ही सीबीएसई की ओर यह व्यवस्था की गई है। इससे 10वीं के बाद स्कूल बदलने वाले छात्रों को आगे परेशानी नहीं होगी"-वैशाली सेठ प्राचार्य होलीक्रास स्कूल कांपा
"बोर्ड और स्कूल एग्जाम दोनों ही विकल्प छात्रों के लिए बेस्ट है। परीक्षा का चयन करने के लिए छात्रों के ऊपर कोई दबाव नहीं है"-डीडी मंजूनाथ, प्राचार्य केंद्रीय विद्यालय डब्लूआरएस कॉलोनी(दैनिक भास्कर,रायपुर,2.12.2010)
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