राजस्थान में एक बार फिर जातीय संघर्ष के हालात बनते जा रहे है। करीब तीन साल पहले गुर्जर और मीणा समाज आमने-सामने हुए थे एवं उस समय प्रदेश में हालात कानून व्यवस्था के लिहाज से काफी खराब हो गए थे। उस दौरान गुर्जर आरक्षण को लेकर हुए उग्र आदोलन में 70 से अधिक गुर्जरों की मौत हो गई थी। पश्चिमी राजस्थान के आधा दर्जन जिलों में मीणा-गुर्जर आमने-सामने हो गए थे। अब एक बार फिर जातिय संघर्ष के हालात बनते जा रहे है। इस बार भी आन्दोलन की अगुवाई वे ही कर्नल किरोडी सिंह बैंसला कर रहे है जो पिछले गुर्जर आन्दोलन के नायक थे। उन्होंने राज्य में पांच प्रतिशत आरक्षण दिए बिना नई भर्तियां करने के विरोध में 20 दिसंबर से करौली जिले के पीलूपुरा में फिर से आंदोलन की घोषणा की है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक किरोड़ी सिंह बैंसला के नेतृत्व में पांचना बांघ पर शुक्रवार को हुई 24 गांवों की पंचायत में यह फैसला किया गया। राज्य सरकार पर पेंचला महापड़ाव के समझौते से मुकरने का आरोप लगाते हुए बैसला ने कहा कि सरकार या तो गुर्जरों को नई भर्ती में पांच प्रतिशत आरक्षण दे या फिर इस भर्ती को रोक दे। उन्होंने कहा कि इस बार गुर्जर समाज पीछे नहीं हटेगा। पंचायत के दौरान ऊर्जा मंत्री जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने टेलीफोन से वार्ता का प्रस्ताव दिया, लेकिन इसे यह कहकर ठुकरा दिया गया कि अब कोई बात नहीं होगी। गुर्जरों के दूसरे गुट के नेता रामवीर सिंह विधुडी ने भी दौसा जिले के बांदीकुई में आंदोलन की घोषणा की है। गुर्जरों के मुखर होते ही मीणा समाज के नेता भी सक्रिय हो गए है। सांसद डॉ.किरोड़ी लाल मीणा सहित कुछ अन्य मीणा नेताओं के बीच बैठकों का दौर चल रहा है(दैनिक जागरण,जयपुर,20.12.2010)।
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