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20 दिसंबर 2010

यूपी में शिक्षा का अधिकार : केंद्र के भरोसे का इंतजार

शिक्षा के अधिकार को लेकर उत्तर प्रदेश में अजीबोगरीब स्थिति है। केंद्र सरकार ने पहली अप्रैल से पूरे देश में इस केंद्रीय कानून को लागू तो कर दिया है लेकिन शिक्षा के अधिकार को अमली जामा पहनाने के लिए प्रस्तावित आदर्श नियमावली को सूबे में अब तक मंजूरी नहीं मिल पायी है।
शिक्षा के अधिकार को सच्चाई के धरातल पर उतारने के भारी-भरकम खर्च को लेकर चिंतित राज्य सरकार को इस मामले में केंद्र से अश्वासन की दरकार है। राज्य सरकार केंद्र से यह भरोसा चाहती है कि वह शिक्षा के अधिकार के खर्च में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी में 65:35 के अनुपात को मार्च 2014 के बाद भी जारी रहेगा। इस संबंध में राज्य की ओर से केंद्र को पत्र भेजा जा चुका है। राज्य को इस मामले में केंद्र के आश्वासन का इंतजार है।
शिक्षा के अधिकार के भारी-भरकम खर्च को झेलने में सरकार खुद को असमर्थ पा रही है। मुख्यमंत्री मायावती इस संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को व बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ धर्म सिंह सैनी मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को पत्र भी लिख चुके हैं। पत्र में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया था कि प्रदेश में इस अधिनियम को अमली जामा पहनाने के लिए वार्षिक 18,000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। सूबे में सर्व शिक्षा अभियान पर होने वाले खर्च में केंद्र व राज्य की हिस्सेदारी 55:45 के अनुपात में है। राज्यों के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने शिक्षा के अधिकार पर होने वाले खर्च में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 65: 35 के अनुपात में तय की है। केंद्र ने यह भी कह दिया है कि हिस्सेदारी 31 मार्च 2014 को समाप्त हो रहे वित्तीय वर्ष तक के लिए होगी।

यही राज्य सरकार के लिए चिंता का विषय है। राज्य सरकार को आशंका है कि अन्य केंद्र पुरोनिधानित योजनाओं की तरह शिक्षा के अधिकार के लिए भी केंद्र सरकार 2014 के बाद खर्च में अपनी हिस्सेदारी घटा सकती है। इसी आशंका के चलते शिक्षा के अधिकार अधिनियम की आदर्श नियमावली को मंजूरी देने से राज्य सरकार हिचक रही है। बेसिक शिक्षा सचिव अनिल संत भी सरकार की इस आशंका की पुष्टि करते हैं। वह कहते हैं कि पूर्व के अनुभव को देखते हुए राज्य सरकार की यह आशंका जायज है। यदि केंद्र ने मार्च 2014 के बाद शिक्षा के अधिकार के खर्च में अपनी हिस्सेदारी घटायी तो राज्य सरकार के लिए अतिरिक्त वित्तीय व्ययभार को वहन कर पाना मुश्किल होगा।
इस संबंध में हाल ही में बेसिक शिक्षा मंत्री धर्म सिंह सैनी मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को पत्र लिखकर शिक्षा के अधिकार पर होने वाले खर्च में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी को मार्च 2014 के बाद भी 65:35 के अनुपात को बरकरार रखने की गुजारिश कर चुके हैं(दैनिक जागरण,लखनऊ,20.12.2010)।

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