गुरुगोविंद सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) से मास मीडिया की पढ़ाई कर रहे छात्रों में अब राजनीति के साथ-साथ वैज्ञानिक सोच का भी विकास किया जा रहा है।
छात्रों को एक उम्दा प्रोफेशनल बनाने के उद्देश्य से खासतौर पर पाठ्यक्रम में कुछ ऐसे बदलाव किए गए है कि मार्क्स के साम्यवाद, महात्मा गांधी के गांधीवाद, सात्र के अस्तित्ववाद और रविन्द्रनाथ टैगोर की वैश्विक सोच का ज्ञान एक साथ छात्रों को उपलब्ध हो पा रहा है।
विश्वविद्यालय की ओर से किए गए इन बदलावों के लिए खासतौर पर पांच विषयों को तैयार किया गया है, जिसमें यूनिस्को की ओर से जारी प्रयासों को भी शामिल किया गया है।
विश्वविद्यालय के मीडिया विभाग के प्रमुख प्रो. सीपी सिंह ने मास्टर ऑफ मास मीडिया पाठ्यक्रम के बारे में बताया कि पहले साल के दो सेमेस्टर में किए गए इन बदलावों के पीछे की सोच छात्रांे को अध्ययन की एक नई दिशा देना है, ताकि वे खबरों से आगे की समझ को विकसित कर सकें।
उन्होंने बताया कि पहले सेमेस्टर मे इंडियन लिटरेचर का परिचय नाम से एक विषय को शामिल किया गया है, जिसमें मार्क्स, गांधी सात्र और रविन्द्रनाथ टैगोर की सोच को एक साथ छात्रों के बीच ले जाया गया है, ताकि वे जान सकें कि आखिर ये चिंतक समाज, देश और विश्व को किस तरह से देखते थे।
प्रो. सिंह ने बताया कि विभिन्न विचारकों की नसीहतों और उनके निष्कर्षो को खासतौर पर छात्रों के लिए ग्राह्य बनाने के उद्देश्य से इन्हें भारतीय परिपेक्ष्य में समझाया जा रहा है। यूनिस्को की ओर से जारी प्रयासों के तहत मीडिया पाठ्यक्रमों में सोशल साइंसेज की जरूरत को महत्व दिया है और इसका ज्ञान छात्रों को दिया जा रहा है।
जबकि मीडिया के विकास को लेकर भी कल, आज और कल का ज्ञान छात्रों को अलग विषय के माध्यम से नए पाठ्यक्रम में उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि फोटोग्राफी व सिनेमा का परिचय छात्रों से कराने के लिए भी एक विषय तैयार किया गया है जो पश्चिमी सोच से परे का ज्ञान छात्रों को देता है।
इसी कड़ी में प्रथम वर्ष के दूसरे सेमेस्टर में मीडिया, इकोनॉमिक्स एंड मैनेजमेंट विषय के माध्यम में से मीडिया में आए बदलावों का ज्ञान युवा छात्रों तक पहुंचाया जा रहा है(शैलेन्द्र सिंह,दैनिक भास्कर,दिल्ली,8.12.2010)।
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