सुप्रीम कोर्ट तथा केंद्र सरकार के गुजरात विरोधी रवैए के खिलाफ वकीलों ने मंगलवार को राज्यव्यापी आंदोलन किया। गुजरात एडवोकेट एसोसिएशन के बैनर तले गुजरात के वकीलों ने उच्चतम न्यायालय की ओर से राज्य में दागी न्यायाधीशों की नियुक्ति पर कड़ी आपत्ति जताई है। वकीलों के नेता के भाजपा से जुड़े होने के कारण इस आंदोलन को राज्य सरकार की ओर से केंद्र व न्यायालय पर दबाव बनाने के रूप में भी देखा जा रहा है। एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष यतिन ओझा ने कहा कि केंद्र सरकार गुजरात के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। गुजरात अखंड भारत का अविभाज्य अंग है, लेकिन केंद्र की कांग्रेसनीत सरकार गुजरात के साथ दुश्मन देश जैसा व्यवहार कर रही है। हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति नहीं किए जाने से नाराज ओझा बताते हैं कि न्यायालयों में लाखों की संख्या में मामले लंबित हैं, सुप्रीम कोर्ट की ओर से खाली पदों पर बड़ी संख्या में किया जा रहा स्थानांतरण भी संदेह के घेरे में है। गुजरात उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के प्रस्ताव अप्रैल 2007 से अटके हैं जबकि अन्य राज्यों के जुलाई 2010 तक के प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है। गुजरात उच्च न्यायालय में 42 न्यायाधीशों के पद स्वीकृत हैं जिनके स्थान पर महज 24 न्यायाधीश ही नियुक्त हैं, जिसके चलते लोगों को न्याय मिलने में देरी हो रही है। ओझा ने आरोप लगाया कि उच्चतम न्यायालय भी इसमें दखल करने के बजाए मूकदर्शक बना हुआ है जिससे वकील समुदाय में काफी नाराजगी है। एसोसिएशन ने साफ कहा है कि राज्य के हाईकोर्ट में वे किसी दागी न्यायाधीश को बर्दाश्त करने वाले नहीं हैं। यदि न्यायालय किसी दागी न्यायाधीश को यहां नियुक्त करता है तो वकील उनका खुला बहिष्कार करेंगे। अधिवक्ता बाबूभाई मांगुकिया का कहना है कि एक साथ बड़ी मात्रा में स्थानांतरण से न्यायाधीशों की गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजिमी है, ऐसे में गुजरात के वकील दागी न्यायाधीशों को बर्दाश्त करने वाले नहीं हैं। गौरतलब है कि एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष यतिन ओझा कांग्रेस के टिकट पर वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं तथा गत विधानसभा चुनावों में कांग्रेस छोड़ भाजपा के शरण में आ गए हैं। इसके अलावा गुजरात बार काउंसिल के अध्यक्ष जे जे पटेल भाजपा लीगल सेल के भी अध्यक्ष हैं जिससे आंदोलन के पीछे भाजपा तथा राज्य सरकार के होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इससे पहले सोहराबुद्दीन मुठभेड़ मामले में भाजपा ने सीबीआई के खिलाफ भी जमकर आंदोलन किया था(शत्रुघ्न शर्मा,दैनिक जागरण,अहमदाबाद,8.12.2010)।
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