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24 दिसंबर 2010

अंबेडकर विश्वविद्यालयःसात साल बाद भी नहीं निकला पुनर्परीक्षा परिणाम

तारीख पे तारीख, तारीख पे तारीख, सन्नी देओल की एक फिल्म का यह डॉयलाग उत्तर प्रदेश के आगरा में अंबेडकर विश्वविद्यालय की कार्यशैली पर बिल्कुल सटीक बैठता है। हालात ये हैं कि सैकड़ों लोगों को इंसाफ दिला चुकीं उपभोक्ता फोरम की पूर्व सदस्य पद्मजा शर्मा को खुद न्याय की दरकार है। अंबेडकर विवि से 2003 में एलएलएम की पुनर्परीक्षा देने के सात साल बाद तक उनका परिणाम घोषित नहीं हो सका है। अब वह कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। पद्मजा शर्मा ने आगरा कॉलेज से साल 2002 में एलएलएम की परीक्षा 53 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी। पीएचडी के लिए 55 प्रतिशत की बाध्यता के चलते उन्होंने 2003 में पुनर्परीक्षा के लिए आवेदन किया। परीक्षा हुई, लेकिन उनका परिणाम सात साल बाद भी घोषित नहीं हो सका। इस बीच कॉलेज से लेकर विवि के सैकड़ों चक्कर भी काटे, लेकिन न उनकी समस्या का समाधान हुआ और न ही कोई संतोषजनक उत्तर प्राप्त हुआ। गोपनीय विभाग और कॉलेज के चक्कर लगाने के दौरान कभी उनकी उपस्थिति का हिसाब मांगा गया तो कभी कहा गया कि उनकी उत्तर पुस्तिकाएं नहीं हैं। कॉलेज से उनकी उपस्थिति के अभिलेख भी खो चुके हैं तो विवि से उत्तर पुस्तिकाएं। कॉलेज का कहना है कि वह अकेली छात्रा थीं, शायद इसलिए उनकी उत्तर पुस्तिकाएं जांची ही नहीं गईं। मंगलवार को उन्होंने कुलसचिव से मुलाकात कर व्यथा सुनाई। पद्मजा का कहना है कि सात साल बाद कुलसचिव के आदेश के बाद उनके प्रार्थना पत्र की रिसीविंग मिल सकी है। पांच साल तक उपभोक्ता फोरम के माध्यम से लोगों को न्याय दिलाने वाली पद्मजा इन सात सालों में मानसिक रूप से बेहद आहत हुई हैं। अब वह कोर्ट जाने की तैयारी कर रही हैं। इस संबंध में कुलसचिव शत्रुघ्न सिंह का कहना है कि मामला एक दिन पूर्व ही उनके संज्ञान में आया है, वह इसकी जांच करा रहे हैं(ममता त्रिपाठी शर्मा,दैनिक जागरण,आगरा,24.12.2010)।

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