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08 दिसंबर 2010

दिल्ली में नर्सरी दाखिलाःकम पढ़े-लिखे माता-पिता परेशान

नर्सरी दाखिले में अभिभावक अभी से विभिन्न मोर्चो से जूझने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। पुराने तजुर्बे को ध्यान में रखें तो उनका यह तनाव वाजिब भी है, क्योंकि हर साल दिल्ली सरकार और शिक्षा निदेशालय दर्जनों दिशा-निर्देश जारी तो करते हैं, लेकिन कुछेक को छोड़ ज्यादातर स्कूल सरकारी दिशा-निर्देश को रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं। अभिभावकों की चिंता की यही वजह है। उनका कहना है कि मनाही होने के बाद भी हर साल स्कूल वाले न केवल अभिभावकों की आय देखते हैं, बल्कि उनका साक्षात्कार लेने से भी पीछे नहीं हटते हैं। बच्चों के नर्सरी में दाखिले की तैयारी में जुटे दो अभिभावकों मनीष प्रताप और सुमित का कहना है कि वह अपने बच्चों का दाखिला राजधानी के अच्छे स्कूलों में कराना चाहते हैं लेकिन अभी से साक्षात्कार के नाम पर डर लग रहा है। महरौली के संजय को भी अपनी बेटी का दाखिला दक्षिणी दिल्ली के अच्छे पब्लिक स्कूल में कराना है। संजय खुद सिर्फ दसवीं पास हैं, लेकिन प्रॉपर्टी डीलर के व्यवसाय में अच्छा पैसा कमाया है। यह समस्या अकेले इन लोगों की नहीं है बल्कि राजधानी में सालों पहले आकर बसे उन सैकड़ों अभिभावकों की है जो अपने समय में किसी दिक्कत की वजह से पढ़ाई पूरी नहीं पाए लेकिन अब उनके पास इतना पैसा है कि वे अपने बच्चों की महंगी शिक्षा का खर्च उठा सकते हैं। लेकिन कम पढ़ा लिखा होने और अंग्रेजी में हाथ तंग होने की वजह से अच्छे स्कूलों के दरवाजे उनके लिए बंद नजर आते हैं। राजधानी के कई ऐसे पब्लिक स्कूल हैं जिन्होंने बीते साल भी माता-पिता की शिक्षा को नर्सरी दाखिले का आधार बनाया और इसके भी प्वाइंट रखे थे। पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के आरसी जैन का तर्क है कि अच्छे पब्लिक स्कूल बच्चों के माता-पिता की पढ़ाई को इस लिए तरजीह देते हैं कि अगर माता-पिता पढ़े-लिखे होंगे और नौकरी वाले होंगे तो वे अपने बच्चों की शिक्षा पर स्वयं ध्यान देंगे जिससे स्कूलों के बेहतर नतीजे सामने आएंगे। हालांकि जमीनी हकीकत पर इस दलील में कोई दम नहीं हैं। वैसे दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री अरविंदर सिंह लवली बीते साल की तरह इस साल भी साफ कर चुके हैं कि स्कूल किसी भी सूरत में माता-पिता ही नहीं बच्चों का भी साक्षात्कार नहीं लेंगे(दैनिक जागरण,दिल्ली,8.12.2010)।

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