दिल्ली पुलिस में अब नौकरी पाने के लिए ‘जाट’ समुदाय के युवक भी ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण का लाभ पा सकेंगे। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था केन्द्रीय प्रशासनिक पंचाट के दो साल पुराने उस फैसले को सही ठहराते हुए दी है जिसमें जाट समुदाय के युवक को दिल्ली पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती में ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण का लाभ देने को कहा गया था।
न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजाग व सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने पंचाट के फैसले के खिलाफ कर्मचारी स्टॉफ सेलेक्शन कमीशन(एसएससी ) द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है। हालांकि आयोग की अपील को खारिज करने के पीछे आधार समय रहते अपील दायर नहीं करने को बनाया गया है। हाईकोर्ट ने यह आदेश आरक्षण के लाभ से वंचित सुनील की ओर से उनके वकील अनिल सिंघल कीउस दलील को स्वीकार करते हुए दी, जिसमें उन्होंने माननीय कोर्ट से कहा था कि दिल्ली पुलिस केन्द्र सरकार के नियंत्रण में है। केन्द्रीय सरकार की सूची के तहत जाट समुदाय ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण पाने का हकदार है, लिहाजा सुनील को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। इसके अलावा, सुनील के वकील ने हाईकोर्ट के सामने यह भी दलील रखी थी कि दिल्ली पुलिस इससे पहले भी जाट समुदाय के पांच युवकों को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण का लाभ पहुंचाते हुए नौकरी दे चुकी है।
दरअसल, वर्ष 2004 में दिल्ली पुलिस ने जाट समुदाय के युवक सुनील को सब-इंस्पेक्टर भर्ती में ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण का लाभ देने से इनकार कर दिया था। एसएससी का कहना था कि सुनील को इसलिए आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता क्योंकि दिल्ली में जाट ओबीसी कोटे में नहीं हैं, लेकिन वर्ष 2008 में केन्द्रीय प्रशासनिक पंचाट ने सुनील को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण का लाभ देने को कहा था(संदीप गुप्ता,दैनिक भास्कर,दिल्ली,2.12.2010)।
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