नवोदय विद्यालय की सफलता को देखते हुए केंद्र की तरह दिल्ली सरकार भी इस तरह का विद्यालय खोलने पर गंभीरता से विचार कर रही है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो दिल्लीवासियों को पहली बार राजकीय छात्रावास विद्यालय की सौगात मिलेगी। इसके लिए बाकायदा सर्वे किया जा रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने जाफरपुर नवोदय विद्यालय का दौरा कर छात्रावास के लिए योजना तैयार करने का काम भी शुरू कर दिया है। शिक्षा विभाग ने दिल्ली में राजकीय छात्रवास खोलने का मन बनाया है। प्रयोग के तौर पर सबसे पहले देहात में छात्रावास स्कूल खोला जाएगा। इसके लिए ईसापुर के राजकीय स्कूल के खाली पड़े 84 कमरों के भवन पर विचार किया जा रहा है। प्रयोग सफल रहा तो दिल्ली के सभी जिलों को स्थान उपलब्धता के आधार पर कम से कम एक-एक छात्रावास विद्यालय की सौगात दी जा सकती है। शिक्षा सचिव ने इसके लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को नवोदय विद्यालय का दौरा कर स्कूल पर होने वाले खर्च का अध्ययन कर जल्द रिपोर्ट पेश करने को कहा है। शिक्षा विभाग का एक दल मंगलवार को जाफरपुर स्थित नवोदय विद्यालय पहुंचा। वहां उन्होंने छात्र के रहने-खाने, शिक्षा, बिल्डिंग के रखरखाव, वेतन आदि पर होने वाले सभी खर्चो का बारीकी से अध्ययन किया। फिलहाल नवोदय विद्यालय में 456 बच्चे हैं। अध्ययन के बाद पता चला कि हर बच्चे पर प्रति माह 48 सौ रुपये का खर्चा होगा। वहीं सूत्रों से पता चला है कि शिक्षा विभाग को एक गैर सरकारी संस्था ने 45 सौ रुपये प्रति माह प्रति बच्चा देने पर छात्रावास स्कूल चलाने का प्रपोजल भी दिया है। इस पर शिक्षा विभाग ने विचार नहीं किया है। राजकीय छात्रावास विद्यालय की क्षमता कितने बच्चों की होगी, इस पर भी विचार नहीं किया गया है। लेकिन शिक्षा विभाग अन्य छात्रावासों का अध्ययन कर जल्द ही राजकीय छात्रवास विद्यालय की घोषणा कर सकता है(दैनिक जागरण,दिल्ली,22.12.2010)।
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