राजस्थानी भाषा को मान्यता के लिए लोकसभा के आगामी सत्र में प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके बाद ही संविधान की आठवीं अनुसूची के अनुसार राजस्थानी भाषा को मान्यता मिल सकेगी। ये बात पाली सांसद बद्रीराम जाखड़ ने कही। वे यहां राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर एवं राजस्थान युवा साहित्यकार परिषद् की ओर से बुधवार को सूचना केन्द्र में आयोजित पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस के 102वें जन्म शताब्दी समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
जयनारायण व्यास विवि के राजस्थानी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. कल्याण सिंह शेखावत एवं वरिष्ठ राजस्थानी साहित्यकार जहूर खां मेहर ने भारतीय भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के तहत मायड़ भाषा राजस्थानी के शब्दकोष को संस्कारों से जुड़ा विश्वज्ञान कोष बताते कहा कि राजस्थानी भाषा एवं संस्कार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जाने चाहिए।
राजस्थानी चिंतन परिषद्, उदयपुर के प्रदेशाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह बारठ ने कहा कि राजस्थानी भाषा की मान्यता से राजस्थान का सर्वांगीण विकास हो सकेगा। इस अवसर पर गीता माछर ने लालस के जीवन पर आधारित गीत प्रस्तुत किया। परिषद् के अध्यक्ष एजे खान ने शताब्दी समारोह के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रमों की जानकारी दी। इस अवसर पर राजस्थानी भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाएं देने पर डॉ. तारालक्ष्मण गहलोत को प्रंशसापत्र, स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।
समारोह में राजस्थानी शब्दकोष के साथ माणक राजस्थानीके तीन दशक की प्रदर्शनी भी लगाई गई तथा चारण संदेश पत्रिका के विशेष अंक का लोकार्पण भी किया गया(राजस्थान पत्रिका,जोधपुर,30.12.2010)।
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