अनुकंपा नियुक्ति के लिए अब और इंतज़ार नहीं
अब अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदकों को भटकना नहीं पडे़गा। राज्य शासन ने इससे संबंधित नियुक्ति नियमों को शिथिल कर दिया है। इस संबंध में मंगलवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रीपरिषद की बैठक में निर्णय लिया गया। बैठक में भोपाल की लिंक रोड नंबर 3 पर अर्बन सेंटर के लिये जमीन आवंटन, चार महत्वपूर्ण सड़कों को प्रशासकीय स्वीकृति और दैनिक वेतन पर कार्य कर रहे समयपालों को नियमित करने सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। राज्य सरकार के प्रवक्ता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि अब अनुकंपा नियुक्ति के लिये जिस कार्यालय में आवेदन किया जाएगा, वह पात्रतानुसार पद रिक्त होने पर उसे नियुक्ति देगा। यदि आवेदित कार्यालय में पद रिक्त नहीं है तो आवेदक का प्रकरण जिला कलेक्टर को भेजा दिया जायेगा। आवेदक को जिले में ही किसी भी विभाग में रिक्त लिपिक, चतुर्थ श्रेणी के पद पर कलेक्टर द्वारा अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। यदि अन्य विभागों में भी पद रिक्त नहीं है तो आवेदक की शैक्षणिक योग्यता के अनुसार संविदा शाला शिक्षक वर्ग-तीन अथवा वर्ग-दो के पद पर अनुकंपा नियुक्ति कलेक्टर के निर्देश पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा दी जायेगी। उन्होंने बताया कि यदि आवेदक संविदा शाला शिक्षक वर्ग-3 अथवा वर्ग-2 के पद पर अनुकंपा नियुक्ति स्वीकार नहीं करता तो उसका आवेदन हमेशा के लिये नस्तीबद्ध कर दिया जायेगा। डॉ. मिश्रा ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए वर्तमान में शासकीय सेवक की मृत्यु से सात वर्ष तक पद उपलब्ध होने की शर्त प्रभावशील है।
कॉलेजों ने बिगाड़ा काउंसिलिंग का गणित
लेटरल एंट्री की काउंसलिंग ने तकनीकी शिक्षा विभाग के लिए मुफ्त में हुए बदनाम वाली स्थिति कर दी है। एक ओर तो काउंसलिंग करके विभाग ने राजभवन में अपनी छवि बिगाड़ ली, वहीं इस काउंसलिंग से प्रवेश गिनती के भी नहीं हुए। जानकारी के अनुसार इस साल लेटरल एंट्री की परीक्षा में करीब 3400 छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। इनमें से भी महज 350 ने ही राज्य शासन की ऑन लाइन काउंसलिंग के जरिए बमुश्किल प्रवेश लिये हैं। शेष बची सीटें कालेजों को सौंप दी गई हैं। कालेज स्तर की काउंसलिंग भी विभाग ने नौ दिसंबर से रख दी थी। राजभवन का सख्त रवैया देखते हुए फिलहाल इसे रोक दिया गया है, लेकिन 90 फीसदी सीटें कालेजों को सौंप दिए जाने से इस मामले में साजिश की आशंका जताई जाने लगी है। माना जा रहा है कि परीक्षा में शामिल अधिकांश छात्रों को कालेजों ने काउंसलिंग के पहले ही सीधे प्रवेश दे दिए थे। अब कालेज स्तर काउंसलिंग के जरिए इन सभी पर शासन की मोहर लगवाने की औपचारिकता निभाई जा रही है। बीयू ने स्थगित की काउंसलिंग : बीफार्मा द्वितीय वर्ष में प्रवेश के लिए बीयू द्वारा बुधवार 15 दिसंबर को कालेज स्तर की काउंसलिंग रखी गई थी। मगर मंगलवार को अचानक इसे स्थगित कर दिया गया है। विभागाध्यक्ष का कहना है कि अगली तिथि शासन के आदेश पर घोषित की जाएगी। इस संबंध में दूरभाष क्रमांक 0755- 2491848 पर जानकारी ली जा सकती है।
(उक्त दोनों खबरें दैनिक जागरण,भोपाल,15.12.2010 से)
इंदौरः7 हजार के बजाय 1.85 लाख फीस
उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर ग्वालियर से आई टीम ने मंगलवार को गीताभवन क्षेत्र के आधा दर्जन संस्थानों पर छापे मारे। इनमें से कुछ में भारी फर्जीवाड़ा सामने आया है। तीन पर एफआईआर दर्ज होगी। दो संस्थानों के पास गड़बड़ी नहीं मिली पर लापरवाही के लिए उन्हें चेतावनी देकर छोड़ा।
साहब आप दो दिन रुक जाएं, हम सारे पेपर बुलवा लेंगे.. सर प्लीज आप हमारी बात सुनें, हमारे पास एमओयू की कॉपी है लेकिन वह हेड ऑफिस से बुलवाना पड़ेगी। ग्वालियर से आई तीन सदस्यीय कमेटी जब मंगलवार को गीताभवन क्षेत्र के यूईआई ग्लोबल इंस्टिट्यूट पहुंची तो कर्ता-धर्ता कुछ यही गुहार लगा रहे थे।
लगभग यही स्थिति हर संस्थान में नजर आई। दरअसल तीन कॉलेज न तो सही एमओयू प्रस्तुत कर पाए और न उनके पास शासन की एनओसी थी। यही नहीं, जब फीस टटोली गई तो पता चला एक संस्थान सात हजार के बजाय 1.85 लाख तो दूसरा संस्थान 17 हजार के बजाय 1.28 लाख फीस वसूल रहा था। तीन संस्थानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। एक संस्थान को चेतावनी दी गई है। दो अन्य में कुछ खास गड़बड़ नहीं मिली।
सुबह दस बजे शुरू हो गई थी कार्रवाई
ग्वालियर से आई टीम के संयोजक और निजी यूनिवर्सिटी नियामक आयोग के सदस्य डॉ. यूएन शुक्ला, होशंगाबाद कॉलेज के प्रो.डॉ. राजीव वर्मा और सिरोंज कॉलेज के प्रो. डॉ. अजय भारद्वाज सुबह दस बजे गीताभवन क्षेत्र पहुंचे। यहां सबसे पहले एवलॉन एविएशन एकेडमी पहुंचे और कार्रवाई शुरू की।
इन कॉलेजों पर एफआईआर की तैयारी
कार्रवाई के दौरान टीम को कदम-कदम पर ऐसे संस्थान मिल गए जो नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। गीताभवन क्षेत्र के मात्र 150 मीटर के दायरे में ही टीम को छह संस्थान मिले। अभी इसी क्षेत्र में करीब आधा दर्जन और संस्थान बचे हैं। जांच अधिकारी श्री शुक्ला के अनुसार सभी संस्थानों की विस्तृत जांच के बाद एफआईआर और फिर शासन आगे की कार्रवाई करेगा। कई संस्थानों पर ताले तक डाले जा सकते हैं।
बच गए बाकी संस्थान
टीम इसके अलावा कृष्णा इंस्टिट्यूट पर भी पहुंची। यहां माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी के कुछ कोर्स चल रहे थे, इसलिए इसे कार्रवाई के दायरे में नहीं लिया गया। इसी तरह इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन पर पहुंच टीम ने जांच के बाद संचालकों से कहा कि वे शासन से एनओसी बगैर कोई भी कोर्स शुरू न करें। गीताभवन क्षेत्र में ही स्थित फ्रैंकलिन इंस्टिट्यूट पर सब कुछ सामान्य चल रहा था।
संस्थान- यूईआई ग्लोबल
कोर्स : बैचलर डिग्री इन होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी,बीबीए और कुछ सर्टिफिकेट कोर्स।
फीस : प्रति सेमेस्टर 7 हजार के बजाय पूरे कोर्स की फीस 1 लाख 85 हजार ली जा रही थी। संस्थान का तर्क था कि इसके बदले हम इंटरनेशनल सर्टिफिकेट भी दे रहे हैं।
-शासन की एनओसी नहीं थी।
-दिल्ली की कंपनी और उस्मानिया यूनिवर्सिटी के एमओयू के आधार पर यहां स्टडी सेंटर चलाया जा रहा था। जो नियम के विरुद्ध है।
संस्थान- देवी अहिल्या कम्प्यूटर सेंटर
-एमओयू और शासन की एनओसी नहीं दे पाए।
-रजिस्ट्रेशन देवी अहिल्या के नाम से लेकिन फ्रैंचाइजी आईबीएम की।
-सिक्किम मनीपाल यूनिवर्सिटी से एफिलिएटेड पीजीडीसीए, एमसीए, एमबीए, बीसीए कोर्स चला रहे थे।
संस्थान- एवलॉन एविएशन एकेडमी
-फीस : 17 हजार रु. के बजाय 1 लाख 28 हजार तक लिए जा रहे थे।
-एमओयू और शासन की एनओसी नहीं।
-संस्थान एप्टेक से फ्रैंचाइजी लेकर विनायका मिशन यूनिवर्सिटी के कोर्स चला रहा था।
संस्थान के पास क्या होना चाहिए?
जिस यूनिवर्सिटी के क्षेत्राधिकार में संस्थान आता हो उसकी अनुमति।
उच्च शिक्षा विभाग से एनओसी हो।
जिस यूनिवर्सिटी से एफिलिएशन है, उसका एमओयू।
फीस स्ट्रक्चर कैसे तय होता है
जिस यूनिवर्सिटी से एफिलिएशन है, उसकी फीस क्या है और संस्थान कितने वसूल रहे हैं।
बच्चे क्या देखकर एडमिशन लें
जिस प्रोग्राम में एडमिशन ले रहा है, उसे राज्य शासन या यूजीसी आदि की मान्यता है या नहीं। जिस यूनिवर्सिटी की संबद्धता है, उसे भी मान्यता है या नहीं(जांच कमेटी सदस्य अजय भारद्वाज के मुताबिक)
आज भी कार्रवाई
छह कॉलेजों में से तीन में भारी गड़बड़ मिली। तीनों पर एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। मुझे लगता है तीनों ही संस्थानों में भारी गड़बड़ है। कई गुना ज्यादा फीस वसूली जा रही है। रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी-यूएन शुक्ला,जांच अधिकारी(दैनिक भास्कर,इन्दौर,15.12.2010)
जबलपुरः7 दिन एब्सेंट तो फिर री-एडमीशन!
गैरहाजिर छात्रों से री-एडमीशन के नाम पर फीस वसूली की खबर लगते ही भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने नर्मदा रोड स्थित महर्षि विद्या मंदिर का घेराव कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ घंटों नारेबाजी की।
प्राचार्य के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ। गोरखपुर स्थित महर्षि विद्या मंदिर पहुंचे करीब आधा सैकड़ा एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने दोपहर 1 बजे से प्रदर्शन शुरू कर दिया। संगठन के रिजवान अली, श्रीकांत विश्वकर्मा ने बताया कि सीबीएसई से संबद्ध महर्षि विद्या मंदिर में एक सप्ताह तक गैरहाजिर रहने वाले छात्रों से पुन: प्रवेश के नाम पर डेढ़ हजार रुपए तक की वसूली की जा रही है। जबकि बोर्ड का ऐसा कोई नियम नहीं है जिसके अनुसार इस तरह री-एडमीशन मानकर वसूली की जाए।
कार्यकर्ताओं ने करीब दो घंटे तक जमकर नारेबाजी की। इस अवसर पर संगठन के रॉबिन तिवारी, डब्बू ठाकुर, शहजाद हुसैन, कपिल भोजक, ईशांक भोजक, बादल पंजवानी, पंकज, मोहित घनघोरिया, सिद्धार्थ जैन, आशुतोष नगरिया,नीलेश जैन, अंकुर सोनी, प्रवीण चौधरी, संदीप जैन आदि मौजूद रहे।
अतिरिक्त फीस वसूली संबंधी बातें निराधार है। कुछ निर्देश अनुशासन के लिहाज से हैं जो बेहद जरूरी होते है जिन्हें लागू करने से पहले अभिभावकों से रायशुमारी की जाती है। हर दिशा-निर्देश के पीछे छात्रहित को समाहित रखा जाता है-ममता भट्टाचार्य,प्राचार्य,महर्षि विद्या मंदिर(दैनिक भास्कर,जबलपुर,15.12.2010)
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