राजधानी में नर्सरी की दाखिला प्रक्रिया पर बीते एक पखवाड़े से मंडरा रहे संशय के बादल इस सप्ताह छंटने जा रहे हैं। मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून के तहत मंत्रालय से आए स्पष्टीकरण पर उलझी सरकार को अब खुद मानव संसाधन एवं विकास मंत्री ने साफ कर दिया है कि रैन्डम सेलेक्शन का मतलब लॉटरी कतई नहीं है।
इस मुद्दे पर उलझी शीला सरकार की राह अब आसान हो गई हैं और प्वाइंट सिस्टम को अमली जामा पहनाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए माना जा रहा है कि नए सप्ताह में निदेशालय की ओर से स्पष्ट गाइडलाइंस जारी कर दी जाएगी, जिसके आधार पर 1 जनवरी से राजधानी में नर्सरी दाखिला प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
शिक्षा निदेशालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक स्कूल संगठनों से हुई चर्चा के बाद 25 फीसदी गरीब कोटे को लेकर आम सहमति बन चुकी है। साथ ही यह भी तय हो गया है कि प्वाइंट सिस्टम में सिबलिंग, नेबरहुड व एल्युम्नॉय के तीन अहम मानकों को जरूर जगह दी जाएगी।
ऐसे में जो चिंता रैन्डम सेलेक्शन के विषय पर केंद्र के रवैये को लेकर लगी थी, उसे भी केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि रैन्डम का मतलब कतई लॉटरी नहीं है।
शिक्षा अधिकार कानून का पालन करना अनिवार्य है और दाखिले के नियम बनाने का अधिकार राज्य सरकार को ही है। शिक्षा निदेशालय से जुड़े आलाधिकारियों की माने तो कई बातों को ध्यान में रखते हुए अब गाइडलाइंस तैयार करने का सिलासिला शुरू हो गया है और एक-दो दिन के भीतर इन्हें जारी कर दिया जाएगा।
जिसके आधार पर स्कूल अपने मापदंडों का निर्धारण करेंगे और उन्हें निदेशालय को सौंपेगे। निदेशालय की तैयारियों के बीच अब स्कूल संगठनों की ओर से भी दोहराया जा रहा है कि 1 जनवरी से दाखिले की शुरुआत करने के लिए उन्हें भी पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के प्रमुख आरसी जैन का कहना है कि गाइडलाइंस को लेकर कभी भी किसी तरह का संशय नहीं था। सरकार बेवजह मामले को उलझाने में जुटी थी।
अब जबकि खुद मंत्रालय ने स्थिति साफ कर दी है तो सरकार की जिम्मेदारी बन जाती है कि वह समय रहते ही दाखिले की गाइडलाइंस घोषित कर दें, ताकि स्कूलों के साथ-साथ अभिभावक भी राहत की सांस लें(दैनिक भास्कर,दिल्ली,13.12.2010)।
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