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13 दिसंबर 2010

राज्य सरकारें तय करें स्कूल प्रवेश की श्रेणियां

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि शिक्षा के अधिकार के तहत 25 प्रतिशत आरक्षण लागू करने को लेकर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरटीई के 25 प्रतिशत आरक्षण के तहत विभिन्न श्रेणियों को तय करने का जिम्मा राज्य सरकार का है।

यह राज्य सरकार को तय करना है कि इसके तहत अनुसूचित जाति, जनजाति या अल्पसंख्यक आदि वर्ग को कितना आरक्षण देना है। शिक्षा के अधिकार को लागू करने पर जारी ऊहापोह के बीच ‘दैनिक भास्कर’ ने मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल से विशेष मुलाकात की।

उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह इसी मसले पर शिक्षा सचिवों की बैठक भी बुलाई जाएगी। दिसंबर में आमतौर पर निजी स्कू लों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो जाती है। लेकिन स्कूलों में लॉटरी या प्वाइंट के जरिए प्रवेश पर जारी अनिश्चितता के सवाल पर सिब्बल ने कहा कि उन्होंने यह कभी नहीं कहा कि लॉटरी के मार्फत एडमिशन किया जाए।


मंत्रालय ने 23 नवंबर को जारी दिशानिर्देश में कहा था कि स्कूलों को प्रवेश के लिए खुद अपनी नीति बनानी चाहिए। प्रवेश के लिए वे जो भी कैटेगरी बनाएं वह तार्किक और न्यायोचित हो। 

उन्हें यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों या उनके मां पिता का कोई टेस्ट या इंटरव्यू नहीं लिया जाना है। सेलेक्शन रैंडम आधार पर किया जाना है। उन्होंने इस पर हैरानी जताई कि रैंडम आधार को कुछ स्कूलों या मीडिया ने लॉटरी करार दे दिया। 

यह सही नहीं है। कैटेगरी के मानक जैसे स्कूल से बच्चे के घर की दूरी, भाई-बहनों का आधार, सिंगल पेरेंट आदि हो सकते हैं। लेकिन, यह स्कूलों को ही तय करना है(दैनिक भास्कर,दिल्ली,13.12.2010)।

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