नर्सरी दाखिलों पर दिशा निर्देश जारी करने के बाद निजी स्कूलों की तमाम शंकाओं को दूर करने व सरकार के साथ तालमेल बैठाने के लिए गुरुवार को शिक्षा मंत्री ने एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई।
बैठक में शिक्षा मंत्री अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि दाखिला प्रक्रिया में निजी स्कूलों को पहले के मुकाबले अधिक पारदर्शिता बरतनी होगी, ताकि बच्चों के दाखिले की उम्मीद लगाए अभिभावकों को कोई शिकायत न रहे।
उन्होंने कहा कि अभिभावक खासतौर पर निजी स्कूलों के मनमाने रवैए को लेकर अपना गुस्सा जाहिर करते रहे हैं। बैठक में सबसे महत्वपूर्ण बात निकलकर यह सामने आई कि यदि स्कूल चाहें तो वे छात्रों के लिए सीट बढ़ा सकते हैं, लेकिन फीस नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
सीट बढ़ाने से पहले सभी तय नियमों को पूरा करना होगा और स्कूलों को बढ़ी हुई सीटों के हिसाब मूल ढांचागत सुविधाओं का भी विकास करना होगा।
दिल्ली सचिवालय में बुलाई गई इस बैठक में करीब सौ निजी स्कूलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में सीट बढ़ाने के लिए हरी झंडी दिखाए जाने को निजी स्कूलों के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है।
इससे पहले सीट बढ़ाने को लेकर विभिन्न स्कूलों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। जबकि, इस बार सरकार ने स्वयं अपनी ओर से पहल करते हुए स्कूलों को सीट बढ़ाने की छूट दी है।
सरकार का कहना है कि फिलहाल अभिभावकों से वसूली जाने वाली फीस में इजाफा सही नहीं होगा। सरकार ने निजी स्कूलों के सभी प्रतिनिधियों को अपनी इस मंशा से अवगत करा दिया है। बैठक में मौजूद स्कूलों को बताया गया कि जरूरत पड़ने पर वे सीट तो बढ़ा सकतें है लेकिन फीस नही बढ़ाई जानी चाहिए।
इसके साथ ही यह तय किया गया कि स्कूल फीस के अलावा वसूले जाने अन्य शुल्कों में तय बढ़ोतरी कर सकेंगे। बताते चलें कि अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत इस बार सभी निजी स्कूलों से कहा गया है कि वे अपने यहां 25 प्रतिशत गरीब बच्चों का दाखिला दें।
गरीब बच्चों की फीस व अन्य खर्च सरकार वहन करेगी और स्कूल को सीधे सरकार की ओर से भुगतान किया जाएगा। यह व्यवस्था लागू होने के बावजूद दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष आरसी जैन ने इसका विरोध किया।
जैन ने शिक्षा मंत्री व अधिकारियों के समक्ष विरोध दर्ज करते हुए कहा कि वह इस व्यवस्था के खिलाफ है व जायज तरीके से इसका विरोध करते रहेंगे।
वहीं, सरकार ने साफ किया है कि तय की गई व्यवस्था पर इस विरोध का कोई खास असर नहीं पड़ेगा। सरकार का कहना है कि स्कलों को नियम बनाने की छूट दी गई है लेकिन यह छूट इसलिए दी गई है जिससे वे छात्रों, अभिभावकों और स्कूल के हितों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखें(दैनिक भास्कर,दिल्ली,17.12.2010)।
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