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17 दिसंबर 2010

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग नहीं मानता राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय की डिग्रियों को

उत्तराखण्ड लोकसेवा आयोग ने उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि की एक उपाधि अमान्य कर दी है। राजकीय इंटर कालेज में हिन्दी प्रवक्ता पद हेतु सामान्य संवर्ग के अभ्यर्थियों की पात्रता में मुक्त विवि की एकल उपाधि को मानने से इंकार कर दिया गया है। आयोग द्वारा 16 एवं 17 दिसम्बर को आयोजित साक्षात्कार में अनर्ह अभ्ययर्थियों की सूची जारी कर दी गई है। 15 दिसम्बर शाम को जारी सूची में दर्जन भर अभ्यर्थी ऐसे हैं जो राजर्षि टंडन मुक्त विवि की स्नातक (एकल विषय-संस्कृत) की द्विवर्षीय उपाधि धारक हैं। इन सभी को आयोग ने साक्षात्कार में शामिल होने से रोक दिया है। उत्तराखण्ड लोकसेवा आयोग द्वारा शिक्षा विभाग के प्रवक्ता पद हेतु साक्षात्कार में प्रदेश मुक्त विवि से एकल डिग्री प्राप्त दर्जनों छात्र शामिल नहीं हो पाएंगे। आयोग ने इन छात्रों को विभिन्न कारणों से साक्षात्कार हेतु अनर्ह घोषित किया है। इसमें सर्वाधिक महत्वूपर्ण राजर्षि टंडन मुक्त विवि की (एकल विषय-संस्कृत) की द्विवर्षीय उपाधि को अमान्य घोषित करना है। प्रथम सूची के उत्तीर्ण छात्रों का साक्षात्कार 16 एवं 17 दिसम्बर एवं दूसरी सूची के छात्र 20 एवं 21 दिसम्बर को होना है। दूसरी सूची अभी जारी नहीं की गई है। साक्षात्कार में अनर्ह घोषित मुक्त विवि से उत्तीर्ण छात्रों में आयोग के इस फैसले के प्रति काफी रोष है। छात्रों का कहना है कि हिन्दी प्रवक्ता पद के लिए स्नातक स्तर पर संस्कृत विषय अनिवार्य है। जो छात्र स्नातक स्तर पर संस्कृत विषय का अध्ययन नहीं करते उन्हें मुक्त विवि अथवा प्राइवेट छात्रों की भांति संस्कृत परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। राजस्थान, झारखण्ड, बिहार एवं उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में राजर्षि मुक्तविवि की डिग्री को मान्यता है। ऐसे में उत्तराखण्ड लोकसेवा आयोग का यह निर्णय अभ्यर्थियों के बेहद निराशाजनक है। प्रभावित अभ्यर्थियों के नाम नर नारायण, मुकेश कुमार ,मनोज यादव, धनन्जय सिंह, अरविंद कुमार, कृष्ण प्रकाश तिवारी, पुष्पा जोशी, हिमांशु मिश्र, मनीष कुमार, आलोक सिंह, दिनेश शर्मा, रितेश सिंह(दैनिक जागरण,इलाहाबाद,17.12.2010)।

अमर उजाला,इलाहाबाद संस्करण की रिपोर्टः
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि स्नातक एकल विषय संस्कृत की दो वर्षीय उपाधि को मान्यता देने से मना कर दिया है। आयोग की ओर से हिन्दी प्रवक्ता के लिए साक्षात्कार १६, १७ और २०, २१ दिसंबर को आयोजित किया गया है। आयोग ने १६,१७ दिसंबर को होने वाले साक्षात्कार से ७६ अभ्यर्थियों का अभ्यर्थन निरस्त करने की सूचना १५ दिसंबर को अपनी वेबसाइट पर डाली। इसके बाद यह परेशान अभ्यर्थी मुक्त विवि के रजिस्ट्रार से मिलकर अपनी परेशानी बताई। उन्होंने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के सचिव से बात भी की है। इस पर भी छात्रों की समस्या का निराकरण नहीं हुआ।
जिन ७६ अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त करने की सूचना वेबसाइट पर डाली गई है, उसमें १३ अभ्यर्थी राजर्षि टंडन मुक्त विवि से एकल विषय में डिग्री धारक है। अभ्यर्थियों का कहना है कि हिन्दी प्रवक्ता के लिए स्नातक स्तर पर संस्कृत विषय होना अनिवार्य है। जिसमें लिए इन अभ्यर्थियों ने मुक्त विवि से एकल विषय में दो वर्ष की डिग्री हासिल की थी। इनका कहना है कि मुक्त विवि की इस डिग्री को राजस्थान, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और अन्य संस्थाएं स्वीकार करती हैं।
इस संबंध में मुक्त विवि के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव का कहना है कि गलत फहमी के कारण इन अभ्यर्थियों के फार्म रिजेक्ट किए गए हैं। इससे पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने दो वर्ष की डिग्री देखकर फार्म रिजेक्ट कर दिए थे। इस मामले में जब आयोग के सामने स्थिति स्पष्ट की गई तो आयोग ने फार्म स्वीकार कर लिया। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्रार ने आज इस मामले में शासन से बात करने की कोशिश की है। एकल विषय में डिग्री हासिल करने वाले छात्रों की बात उत्तराखंड सरकार के सामने सही ढंग से रखी जाएगी और छात्रों को न्याय दिलाया जाएगा।

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