मुख्य समाचारः

सम्पर्कःeduployment@gmail.com

19 दिसंबर 2010

मोतिहारी में बिना शिक्षकों वाला डिग्री कालेज

बिहार के मोतिहारी जिले में एक महाविद्यालय ऐसा भी है,जहां शिक्षकों के लगभग दो तिहाई पद रिक्त हैं। 1970 के बाद से यहां स्नातकोत्तर विषयों को पढ़ाने के लिए किसी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई। इसके बावजूद सालाना 350-400 छात्र यहां दाखिला लेते हैं। हैरानी की बात यह है कि उर्दू, फारसी व संस्कृत विषय पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं हैं। इसके बावजूद हर साल विद्यार्थियों का दाखिला होता है, परीक्षाएं होती हैं और विद्यार्थी पास भी हो रहे हैं। कोई यह पूछने को तैयार नहीं है कि आखिर बिना शिक्षक छात्र कैसे पढ़ रहे हैं और कैसे बेहतर रिजल्ट ला रहे हैं। बात हो रही है पूर्वी चंपारण के इकलौते मुंशी सिंह महाविद्यालय की। कालेज को 1972 में राजनीति, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र व दर्शनशास्त्र में ही Fातकोत्तर की पढ़ाई की मंजूरी मिली। इसके बाद शिक्षक स्थानांतरित और सेवानिवृत होते गए, लेकिन उनके स्थान पर किसी की नियुक्त नहीं हुई। कला, विज्ञान, वाणिज्य संकाय में डिग्री देने वाले इस कालेज में हर विभाग में शिक्षकों का टोटा है। द्वितीय राजभाषा उर्दू, फारसी व संस्कृत में तो एक भी शिक्षक नहीं हैं। अंग्रेजी विभाग का जिम्मा सिर्फ एक शिक्षक इकबाल अहमद के जिम्मे है। यहां आठ पद खाली हैं। कामर्स में एकमात्र प्रो. जगदीश महतो पदस्थापित हैं, जबकि तीन पद हैं। पांच शिक्षकों वाले हिन्दी विभाग को डा. अरुण कुमार व डा. मृगेन्द्र कुमार खींच रहे हैं। मनोविज्ञान विभाग को एके रंजन व यमुना राम चला रहे हैं। राजनीति विज्ञान को भी डा. सुमन कुमार व प्रो. सुमन ठाकुर चला रहे हैं। हालत यह है कि शिक्षकों के स्वीकृत 110 पदों की संख्या घटकर 44 पर पहुंच गई है। इस बारे में बात करने पर प्राचार्य डा. नंदकिशोर सिंह का कहना है कि शिक्षकों की कमी के बारे में विश्वविद्यालय और राज्य सरकार को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई(अनिल तिवारी,दैनिक जागरण,मोतिहारी,१९.१२.२०१०)।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।