स्कूली शिक्षा के बढ़ते दायरे के साथ ही राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का भी दायरा और अधिकार दोनों बढ़ेंगे। केंद्र सरकार अब उसे विश्वविद्यालय में तब्दील करने की तैयारी में है। मूल रूप से स्कूली शिक्षा की पाठ्य पुस्तकों के कैरीकुलम (पाठ्यचर्या) तैयार करने, शोध व शैक्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों तक सीमित यह परिषद विश्वविद्यालय बनने के बाद अपने कुछ खास पाठ्यक्रमों में भी पढ़ाई की डिग्रियां बांटेगा। सूत्रों के मुताबिक एनसीईआरटी की ओर से इस बाबत पूर्व में दिए गए प्रस्ताव पर सरकार अब गंभीर है। लिहाजा उसने सात सदस्यीय एक समिति बना दी है। समिति में भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के पूर्व निदेशक प्रो. गोबर्धन मेहता, पूर्व कुलपति मृणाल मिरि, केंद्रीय विश्वविद्यालय, हैदराबाद के कुलपति प्रो. सैयद ई. हसनैन, केंद्रीय विश्वविद्यालय, पुडुचेरी के कुलपति प्रो. जक तारीन, एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक प्रो. एके शर्मा के अलावा एनसीईआरटी के कार्यवाहक निदेशक प्रो. जी. रविंद्रा और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव (माध्यमिक) को रखा गया है। समिति एनसीईआरटी को विश्वविद्यालय बनाने के औचित्य व व्यवहारिकता पर अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी। बताते हैं कि सरकार वैसे तो एनसीईआरटी को सैद्धांतिक तौर पर विश्वविद्यालय बनाने पर सहमत है, लेकिन रिपोर्ट आने के बाद उसे अमलीजामा पहनाने का रास्ता साफ हो सकेगा। एनसीईआरटी के दिल्ली मुख्यालय के अलावा भोपाल, भुवनेश्वर, अजमेर, शिलांग और मैसूर में क्षेत्रीय शिक्षा कार्यालय भी काम कर रहे हैं। वहां से शिक्षकों के प्रशिक्षणके बीएड व एमएड कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जबकि दिल्ली में वह एजूकेशन इन सोशल साइंस व ह्यूमनटीज, एजूकेशन इन साइंस एंड मैथ, एजूकेशन आफ ग्रुप्स विद स्पेशल नीड्स और एजूकेशनल साइकोलॉजी एंड फाउंडेशन आफ एजूकेशन जैसे विभागों के साथ शैक्षिक कार्यक्रम चला रहा है। विश्वविद्यालय बन जाने के बाद इस संस्थान से छात्रों को पीएचडी और एम. फिल जैसे डाक्टोरल प्रोग्राम के अवसर मिल सकेंगे जबकि शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण के मामले में उसका स्तर और ऊंचा हो जाएगा(राजकेश्वर सिंह,दैनिक जागरण,दिल्ली,3.12.2010)।
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