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07 दिसंबर 2010

बरकतउल्ला विश्वविद्यालयःकर्मचारियों ने खोली पोल

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में चहेते कर्मचारियों को नियमित करने और मनचाहा वेतन निर्धारित करने के लिए चल रहे खेल से अब पर्दा उठने लगा है। हालत यह है कि विवि के इस गोरखधंधे से कर्मचारी ही आक्रोशित होने लगे हैं। कर्मचारियों ने खुला आरोप लगाया है कि विवि न केवल मनमाने ढंग से पदों को खाली मान रहा है। वहीं राज्य शासन को भी गुमराह कर लगातार भर्ती की जा रही है। बीयू के आकस्मिक निधि कर्मचारी संघ ने खुले आरोप लगाते हुए कुलपति और कुलसचिव को ही ज्ञापन सौंपा है। इसकी प्रति राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री सहित आला अफसरों को भी दी है। इसमें कर्मचारियों ने विवि का पूरा काला चिट्ठा खोलते हुए हर तरफ मनमानी का आलम बताया है। संघ के अध्यक्ष भगवान सिंह मीणा ने ज्ञापन में बताया कि वर्ष 1998 में लगभग 150 कर्मचारियों को नियमित किया गया था। इसमें न तो वरिष्ठता का ध्यान रखा गया और न शैक्षणिक योग्यता को ही देखा गया। इसका खामियाजा आजतक आकस्मिक निधि कर्मचारी भुगत रहे हैं। योग्य एवं वरिष्ठ होने के बाद भी 15-20 सालों से न्यूनतम वेतन पर कार्यरत हैं। विवि प्रशासन की मनमानी काआलम यह है कि सुरक्षा जवानों के नाम पर तैनात उम्रदराज कर्मचारियों को 7300 रुपए प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। जबकि दैवेभो व सुरक्षा कर्मियों को महज चार हजार रुपए दिए जा रहे हैं। विवि ने फिक्स वेतन पर कार्यरत अपने चहेते कर्मचारियों का वेतन कलेक्टर दर में वृद्धि की आड़ लेते हुए बढ़ा दिया। साथ ही लाखों रुपए का एरियर्स भी बांट दिया। एक ओर आकस्मिक निधि कर्मचारियों को अतिशेष बताकर शासन के निर्देश के बावजूद नियमित नहीं किया जा रहा है। वहीं नए कर्मचारियों की लगातार भर्ती की जा रही है। लगभग यही स्थिति पदों की जानकारी देने में भी है। शासन को भेजी जानकारी में विवि ने 43 पद रिक्त स्वीकार कर लिया, लेकिन तंगहाली का हवाला देते हुए इन्हें भरने से इंकार कर दिया। दूसरी ओर इन्हीं पदों पर अब कर्मचारियों को मनमाने ढंग से समायोजित कर नियमित किया जा रहा है। आकस्मिक कर्मचारियों ने अब इस मनमानी के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है(दैनिक जागरण,भोपाल,7.12.2010)।

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