नौवीं कक्षा से व्यावसायिक शिक्षा कोर्स लागू करने की कवायद तेज हो गई है। सरकार के मुताबिक बदलते दौर में दक्ष (स्किल्ड) मानव संसाधन का पूल तैयार करने के उद्देश्य से नौवीं कक्षा से व्यवसायिक शिक्षा का राष्ट्रीय पाठ्यक्रम पेश करने की तैयारी चल रही है। इस सिलसिले में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने मंगलवार को राज्यों के शिक्षा मंत्रियों से चर्चा की।
सिब्बल ने की राज्यों के शिक्षा मंत्रियों से की चर्चा
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस उद्देश्य से राष्ट्रीय व्यवसायिक शिक्षा मानक प्रारूप तैयार किया है जिसमें स्कूल के विभिन्न स्तरों से विश्वविद्यालय तक विभिन्न स्तरों पर व्यवसायिक शिक्षा की एक व्यवस्था तैयार की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि इसके तहत नौवीं कक्षा से ही आतिथ्य, विधि, वित्त, मनोरंजन, विनिर्माण, टेलीकॉम, आटोमोबाइल आईटी और बीमा क्षेत्र की शिक्षा शुरू करके विश्वविद्यालय स्तर तक जारी रहेगी। एमसीआई के एमबीबीएस और स्नातकोत्तर चिकित्सा के लिए एकल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने पर सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी का स्वागत करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि यह छात्रों के हित में महत्वपूर्ण कदम हैं।
तैयार किया राष्ट्रीय व्यवसायिक शिक्षा मानक प्रारूप
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए सिब्बल ने कहा कि एमबीबीएस और स्नातकोत्तर स्तर पर पूरे देश में एकल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के वह समर्थक रहे हैं और उन्होंने इसके लिए पहल भी की थी। यह छात्रों के हित में हैं। यह पूछे जाने पर कि एकल प्रवेश परीक्षा एमसीआई आयोजित करेगी या मानव संसाधन विकास मंत्रालय? उन्होंने कहा कि यह कोई विषय नहीं है और उन्होंने पहले ही साफ कर दिया था कि यह किसी मंत्रालय से जुड़ा प्रश्न नहीं बल्कि छात्रों के हित से जुड़ा विषय है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने निर्णय में स्पष्ट किया था कि एमसीआई, एमबीबीएस तथा स्नातकोत्तर स्तर पर चिकित्सा परीक्षा आयोजित करने की योजना पर अमल कर सकती है। इस स्पष्टीकरण के बाद सभी सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों के लिए अगले सत्र (2011-12) से एकल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) राष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा परीक्षा का आयोजन करता है और चिकित्सा क्षेत्र में एकल प्रवेश परीक्षा पर अमल के बाद सीबीएसई के तहत आयोजित की जाने वाली प्रवेश परीक्षा मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के दायरे में आ सकती है(अमर उजाला,दिल्ली,15.12.2010)।
दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण की रिपोर्टः
व्यावसायिक शिक्षा पर मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की पहल फिलहाल राज्यों के गले नहीं उतर रही या फिर वे उन्हें इसका महत्व नहीं समझा पाए। वजह जो भी हो, नतीजा यह है कि राज्यों ने सूचना प्रौद्योगिकी, बीमा, आटोमोबाइल, निर्माण, मनोरंजन, दूरसंचार और आतिथ्य जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक शिक्षा की नई कोशिशों को तवज्जो ही नहीं दी। लिहाजा राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा संबंधी पाठ्यक्रम पर बात आगे नहीं बढ़ सकी। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल मंगलवार को यहां इस मसले पर विस्तृत चर्चा और पाठ्यक्रम तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए राज्यों के स्कूली शिक्षा मंत्रियों की बैठक बुलाई थी। मगर केवल उत्तर प्रदेश, हरियाणा, केरल और राजस्थान समेत लगभग आधा दर्जन राज्यों ने ही बैठक में शिरकत की। सिब्बल चाहते हैं कि कक्षा नौ से लेकर विश्वविद्यालय तक व्यावसायिक शिक्षा के नए पाठ्यक्रम को राज्यों की जरूरतों और उनकी मर्जी के लिहाज से तैयार किए जाएं। उसी के तहत बैठक में राज्यों के मंत्रियों के बीच से ही इसके लिए एक कमेटी बनाने की तैयारी थी, लेकिन राज्यों की ओर से बैठक को नजरअंदाज करने के चलते सिब्बल की कोशिशें मुकाम तक नहीं पहंुचीं। हालांकि बैठक में जिन राज्यों ने शिरकत की, व्यावसायिक शिक्षा की इस नई पहल को लेकर उनमें से किसी को कोई खास ऐतराज नहीं था। बैठक में शामिल उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र ने केंद्र की इस पहल से सहमति तो जताई, लेकिन राज्य की अनदेखी को लेकर कुछ सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा के लिए पूर्व में केंद्र की ओर से वर्कशेड और मशीन आदि खरीदने के लिए क्रमश: दो-दो लाख रुपये मिलते थे, जबकि ट्रेनर को 3000 रुपये मासिक मानदेय मिलता था। केंद्र ने इसे 2004 से बंद कर दिया है। उन्होंने खर्च में केंद्र व राज्यों के बीच 75:25 के बंटवारे की इस योजना को फिर से शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि केंद्र के इस रवैये के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार इसे अपने बूते चला रही है। मुख्यमंत्री मायावती के निर्देश पर मानदेय को भी तीन हजार से बढ़ाकर दस हजार रुपये मासिक कर दिया गया है। राज्य में ढाई हजार व्यावसायिक शिक्षक हैं, जिन पर सरकार 25 करोड़ रुपये सालाना खर्च कर रही है। इतना ही नहीं, उसने एक कदम और आगे बढ़ते हुए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आइटीआइ), पॉलीटेक्निक व अन्य पाठ्यक्रमों को शामिल करते हुए अलग से व्यावसायिक शिक्षा परिषद का गठन कर दिया है।
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