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22 दिसंबर 2010

बरकतउल्ला विविःअब सामने आया डिग्री कागज़ घोटाला

फर्जी डिग्री तो बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की नियति बन ही गई है। आए दिन फर्जी डिग्री सामने आ जाती हैं। अब डिग्री के कागज में फर्जीबाड़ा सामने आया है। जिस दर पर डिग्री छपवाकर मिलती रही हैं। विवि में उसी दर पर कोरा कागज खरीदने की तैयारी पूरी हो गई थी। ऐन मौके पर कुलपति द्वारा भुगतान रोकते ही अफसरों ने भी मुंह बंद कर लिया है। जानकारी के अनुसार मंगलवार को कुलपति के सामने स्क्लेटन (डिग्री का कागज) भुगतान की फाइल पहुंची थी। इसमें एक बत्तीस रुपए की दर से स्क्लेटन खरीदे जाने थे। इस प्रस्ताव पर विश्वविद्यालय के सारे अधिकारियों के साथ ही वित्त अधिकारी भी मंजूरी दे चुके थे। मगर कुलपति के पास फाइल पहुंचते ही इसे रोकने के निर्देश दे दिए गए। इसकी वजह है प्रति स्क्लेटन तय की गई दर। जानकारी के अनुसार पिछले साल 32 रुपए में ही प्रिंटेड स्क्लेटन विवि ने खरीदे थे। आश्चर्य की बात यह है कि सतना की जिस फर्म से 32 रुपए में कोरे कागज खरीदे जा रहे हैं। पिछले दो सालों से यही प्रिंटर पूरा मैटर छापकर विवि को दे रहा था। दो साल पहले तो छात्रों के नाम सहित तमाम जानकारी भी छापकर इस संस्था ने दी थी। सूत्रों के मुताबिक यही पुराना रिकार्ड कुलपति को दिखाया व बताया गया। शक के आधार पर तत्काल पुराने बिल भी कुलपति को दिखाए गए। इन्हें देखकर कुलपति ने फिलहाल कागज की खरीदी रोक दी है(दैनिक जागरण,भोपाल,22.12.2010)।

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