प्राइवेट स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया लगभग खत्म होने को, लेकिन शिक्षा विभाग अब तक आरटीई के ड्राफ्ट रूल्स तैयार नहीं कर सका। कानून को लागू हुए करीब नौ महीने बीत चुके हैं। अब स्कूल प्रिंसिपल चिंतित हैं कि यदि वे आरटीई को लागू नहीं कर सके तो शिक्षा विभाग उन्हें नोटिस भेज देगा। हालांकि मंगलवार को इस सिलसिले में एक बार फिर प्रशासन के अधिकारियों की स्कूल प्राचार्यों के साथ बैठक हो रही है। बैठक के एजेंडे के बारे में भी स्कूल प्रिंसिपल अनजान हैं। उन्हें लग रहा है कहीं यह भी पिछली बैठकों की तरह खोखली न हो।
प्रशासन और स्कूल प्रिंसिपलों के बीच आरटीई को लेकर पहली बैठक अप्रैल में हुई थी। इसी बैठक में स्कूल प्रिंसिपलों ने कह दिया था कि अगर आरटीई को २०११ से लागू करना है तो उन्हें समय रहते इस संबंध में सारे निर्देश मिल जाने चाहिए, ताकि उन्हें आरटीई को लागू करने में दिक्कत न हो। इस बैठक के बाद कई और बैठकें भी हुईं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अमर उजाला की पिछले दिनों आयोजित राउंड टेबल कांफ्रेंस में भी प्रिंसिपलों ने इस मुद्दे पर गहन मंथन किया था। इंडीपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष एचएस मामिक के मुताबिक अप्रैल में ही शिक्षा विभाग को समय रहते आरटीई संबंधी दिशा-निर्देश तैयार करने को कहा गया था। कोई स्कूल आरटीई के विरोध में नहीं हैं, लेकिन, बिना स्पष्टता के इसे कैसे लागू किया जा सकता। दिल्ली पब्ल्कि स्कूल-४० की प्रिंसिपल रीमा दीवान के मुताबिक दाखिला प्रक्रिया खत्म हो चुकी है, लेकिन, उन्हें अभी तक यह आरटीई को लेकर स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं। शिक्षा विभाग के इस लापरवाह रवैये से कुछ अन्य स्कूल संचालक और पिं्रसिपल भी नाराज हैं।
क्या कहते हैं प्रिंसिपल
आरटीई एक बड़ी योजना है और लागू करना भी बड़ी जिम्मेदारी। स्थानीय प्रशासन ही गाइड लाइंस जारी करेगा, जिसका हम इंतजार कर रहे हैं, लेकिन हमारा सुझाव है कि इससे पहले निजी स्कूलों के साथ एक बैठक होनी चाहिए, ताकि उसमें विचार-विमर्श किया जा सके। योजना आरक्षण से जुड़ी है और हमें अपने खर्चे भी निकालने हैं, इसलिए विभाग को हमारी मजबूरियां भी समझनी चाहिए।
गुरप्रीत बख्शी, स्कूल प्रबंधक, सेंट कबीर स्कूल, सेक्टर २६
हम लोग तो गाइड लाइन्स का इंतजार कर रहे हैं। अभी तक अखबारों के माध्यम से ही जानकारी मिली है, लेकिन हकीकत में कैसे योजना लागू होगी। दिल्ली की तर्ज पर चंडीगढ़ प्रशासन को भी निजी स्कूलों के साथ मिलकर गाइड लाइन्स बनानी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की बाद में दिक्कत या सवाल न रहे। एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, इसलिए गाइड लाइन्स की कमी खल रही है।
रविंद्र तलवार, निदेशक, बैनयन ट्री स्कूल, सेक्टर-४८
आरटीई में कैसे एडमिशन देना है, क्या स्वरूप होगा, उसके बारे में कुछ भी साफ नहीं है। सुनी-सुनाई बातों पर ही अटकलें लग रही हैं। अब तो शिक्षा विभाग की बैठक का इंतजार है, जिसमें तय होगा कि क्या कैसे करना है। इसके अलावा बैठक के बाद जब गाइड लाइन्स का सर्कुलर आएगा, उसके बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी। योजना का स्वरूप बनाने में प्रशासन ने बहुत देर कर दी है, अब तक तो पूरा ढांचा तैयार हो जाना चाहिए था।
सरोज सावंत, प्रिंसिपल, मोती राम आर्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर २७
आरटीई के बारे में कुछ भी साफ नहीं है। बस अब शिक्षा विभाग के साथ निजी स्कूल प्रबंधन के साथ होने वाली बैठक का इंतजार है, जब योजना के बारे में अधिक जानकारी मिल पाएगी। फिलहाल योजना के तहत कैसे काम करना है, अभी पता नहीं है।
विनीता अरोड़ा, प्रिंसिपल, भवन विद्यालय, सेक्टर-२७
आरटीई को कैसे लागू करना है इसकी हमें जानकारी नहीं है। खासकर स्कूल के एक किलोमीटर के अंदर रहने वाले बच्चों को ही ईडब्लूएस की २५ फीसदी सीटों पर दाखिला देने की बात स्पष्ट नहीं है। इन सीटों के खाली रह जाने पर हम उसे जनरल में तब्दील कर सकते हैं या नहीं, इसकी जानकारी भी हमें नहीं है। जब तक शिक्षा विभाग हमें स्पष्ट निर्देश नहीं देता है, तब तक हम आरटीई को लागू नहीं कर सकेंगे।
संजय सरदाना, निदेशक, मानव मंगल ग्रुप ऑफ स्कूल्स(अमर उजाला,चंडीगढ़,21.12.2010)
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