डीयू में पिछले दो दिनों से साइंस के प्रोफेसरों की स्पेशल क्लास लग रही है। अटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (एईआरबी), मुंबई की टीम के एक्सपर्ट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों को पढ़ा रहे हैं कि रेडिएशन सेफ्टी किस तरह से सुनिश्चित की जा सकती है। तीन दिन के ट्रेनिंग प्रोग्राम में साइंस के सभी डिपार्टमेंट से करीब 39 प्रोफेसर, असोसिएट प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसर पढ़ रहे हैं। इन सभी को शुक्रवार को होने वाले एग्जाम की तैयारी करने को भी कहा गया है। एक घंटे का एग्जाम होगा और यह जांचा जाएगा कि प्रोफेसरों ने ट्रेनिंग के दौरान कितना कुछ सीखा। एग्जाम के बाद इंटरव्यू भी होगा और उसके बाद एग्जाम पास करने वालों को सर्टिफिकेट दिए जाएंगे। एग्जाम का प्रश्न पत्र एईआरबी ने ही तैयार किया है।
दरअसल एईआरबी द्वारा डीयू से रेडियोएक्टिव मटीरियल यूज करने की इजाजत वापस ले ली गई थी और यूनिवर्सिटी में रिसर्च वर्क ठप हो गया था। जिसके बाद यूनिवर्सिटी ने एईआरबी से अपील की थी कि स्टूडेंट्स के हितों को देखते हुए रोक हटाई जाए। अब एईआरबी की टीम प्रोफेसरों को ट्रेनिंग दे रही है और उम्मीद बढ़ गई है कि डीयू पर लगी रोक जल्द हट जाएगी। इस टीम में शामिल एईआरबी के वैज्ञानिक अधिकारी राजू कुमार ने बताया कि जब यह सुनिश्चित हो जाएगा कि डीयू सभी नियमों का पालन कर रही है तो यह प्रतिबंध हटा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी ने रेडिएशन सेफ्टी के लिए कई कदम उठाए हैं और इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के आयोजन का मकसद भी यही है। लैबोरेटरी में स्टूडेंट्स की मदद करने वाले और रिसर्च वर्क में शामिल साइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसरों को यह स्पेशल ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि वे अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह से निभा सकें और सुरक्षा को कोई खतरा भी न हो। कुमार के मुताबिक हर डिपार्टमेंट ने अपने यहां से प्रोफेसरों का नाम दिया है, जिन्हें ट्रेनिंग दी जा रही है।
खास बात यह है कि इन सभी प्रोफेसरों को एग्जाम व इंटरव्यू पास करना होगा ताकि प्रतिबंध हटवाने की दिशा में यूनिवर्सिटी एक कदम आगे बढ़ा सके। पास होने वाले प्रोफेसरों को रेडियोलॉजिकल सेफ्टी ऑफिसर्स लेवल 1 का सर्टिफिकेट दिया जाएगा। ट्रेनिंग प्रोग्राम के दौरान रेडिएशन सेफ्टी कीबेसिक जानकारी से लेकर वेस्ट डिस्पोजल तक के बारे में विस्तार से बताया गया है। एक्सपर्ट ने प्रैक्टिकल के जरिए भी समझाया है। रेडियोएक्टिव मटीरियल को किस तरह से भेजा जाए, इस बारे में भी जानकारी दी गई है। एईआरबी ने यूनिवर्सिटी को साफ संकेत दे दिया है कि भविष्य में अब किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए और ट्रेनिंग में जो भी उपाय बताए गए हैं, उनका पूरी तरह से पालन होना चाहिए। ट्रेनिंग में एंथ्रोपॉलजी, बॉटनी, केमिस्ट्री, जियॉलजी, जूलॉजी, फिजिक्स समेत सभी साइंस डिपार्टमेंट से प्रतिनिधि शामिल हुए हैं।
यूनिवर्सिटी के मुताबिक आगे जो भी मटीरियल ऑक्शन होगा , उसे अटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड ( एईआरबी ) एक्सपर्ट की निगरानी में ही किया जाए। ऑक्शन से पहले एईआरबी को लिस्ट भेजी जाएगी। जिन डिपार्टमेंट में रेडियोएक्टिव मटीरियल यूज होता है , उनमें से हर एक में सेफ्टी ऑफिसर्स नियुक्त होगा। रेडियोएक्टिव मटीरियल पर खास सिंबल होगा और हर साल एईआरबी को स्टेटस रिपोर्ट भेजी जाएगी। गौरतलब है कि डीयू के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट की लापरवाही के चलते कोबॉल्ट 60 से लैस गामा सेल को कबाड़ में बेच दिया गया था(भूपेंद्र,नवभारत टाइम्स,दिल्ली,3.12.2010)।
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