मुख्य समाचारः

सम्पर्कःeduployment@gmail.com

01 दिसंबर 2010

अब भी खाली हैं तीन लाख शिक्षकों के पद

छह से चौदह साल तक के बच्चों को मुफ्त व अनिवार्य पढ़ाई के लिए सरकार ने शिक्षा अधिकार कानून तो लागू कर दिया, लेकिन शिक्षकों का टोटा अब भी बना हुआ है। आलम यह है कि सर्वशिक्षा अभियान के तहत होने वाली शिक्षकों की नियुक्तियों में राज्य सरकारें उदासीन हैं। नतीजतन अभियान के तहत ही लगभग तीन लाख शिक्षकों के पद अब भी खाली पड़े हैं। इतना ही नहीं, नए स्कूल खोलने, भवनों और अतिरिक्त क्लास रूम बनवाने के मामले में भी उन्होंने यही रवैया अपना रखा है। सूत्रों के मुताबिक इस साल मार्च तक सर्वशिक्षा अभियान के तहत देशभर में लगभग 13 लाख शिक्षकों की नियुक्ति होनी थी, लेकिन वह सवा दस लाख के आगे नहीं बढ़ पाई। इस मामले में बिहार का प्रदर्शन ज्यादा खराब रहा है। राज्य सरकार को लगभग दो लाख 60 हजार शिक्षकों की नियुक्ति करनी थी, लेकिन वह स्कूलों को सिर्फ एक लाख 60 हजार शिक्षक ही मुहैया करा सकी। अलबत्ता झारखंड और उत्तर प्रदेश इस मामले में काफी ठीक रहे। झारखंड 94,605 के लक्ष्य के विपरीत 83,500 शिक्षकों की नियुक्ति में कामयाब रहा। जबकि उत्तर प्रदेश लगभग पौने तीन लाख के लक्ष्य के विपरीत लगभग ढाई लाख शिक्षकों की भर्ती करने में सफल रहा। बड़े राज्यों में पश्चिम बंगाल की स्थिति सबसे बदतर रही। उसे स्कूलों को एक लाख सात हजार शिक्षक मुहैया कराने थे, लेकिन वह महज 61 हजार शिक्षकों की नियुक्ति तक ही सीमित रह गया। केंद्र सरकार इस बात से खुश है कि छह से चौदह साल तक के सिर्फ चार प्रतिशत बच्चे अब स्कूलों से महरूम हैं, जबकि शिक्षकों की भारी कमी के अलावा और समस्याएं भी कम नहीं हैं। मसलन तीन लाख 32 हजार नए स्कूल खुलने थे, लेकिन उसमें 32 हजार भी तय अवधि में नहीं खुल पाए। इसी तरह स्कूल भवनों व अतिरिक्त क्लास रूम निर्माण का भी लक्ष्य नहीं हासिल हुआ। बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश में 27 लाख 69 हजार, बिहार में 13 लाख 45 हजार, पश्चिम बंगाल में सात लाख बच्चों को अभी भी स्कूल नसीब नहीं हुआ है।(दैनिक जागरण,दिल्ली,1.12.2010)।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।