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01 दिसंबर 2010

नर्सरी दाखिले में नहीं होगा मैनेजमेंट कोटा

नर्सरी में दाखिले को लेकर लगातार जारी असमंजस सोमवार को खत्म हो गया। शिक्षा मंत्री अरविंदर सिंह लवली ने आगामी एक जनवरी से नर्सरी दाखिले शुरू करने का घोषणा करते हुए साफ कर दिया है कि अगले सप्ताह दाखिले की गाइडलाइंस जारी कर दी जाएगी।

सरकार इन गाइडलाइंस के निर्धारण को लेकर स्कूलों की ओर से आ रही आपत्तियों पर भी विचार करने को तैयार है, बशर्ते स्कूल लिखित तौर पर इसकी जानकारी गुरुवार तक पेश कर दें।

नर्सरी दाखिलों को लेकर बीते दिनों केन्द्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय की ओर से आए स्पष्टीकरण पर विचार करने और स्कूलों का रुख जानने के लिए सोमवार 29 नवम्बर को दिल्ली के शिक्षा मंत्री अरविंदर सिंह लवली ने शिक्षा निदेशालय के आला अधिकारियों व राजधानी की स्कूल एसोसिएशनों के पदाधिकारियों के साथ एक बैठक कर चर्चा की।


इस चर्चा के बाद उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने आरटीई एक्ट के तहत यह दिशा-निर्देशदिए हैं कि स्कूल क्राइटेरिया बनाने के लिए फ्री होंगे, लेकिन दाखिले के लिए उम्मीदवारों का चयन रैनडम आधार पर ही होगा। उन्होंने साफ किया कि चूंकि मंत्रालय का आदेश है, इसलिए इसे स्कूलों को मानना ही होगा। 

बैठक में हुई चर्चा के बाद साफ हो गया कि नर्सरी दाखिले की दौड़ 15 दिसम्बर के बजाए इस बार एक जनवरी से शुरू होगी और 31 मार्च तक चलेगी। 

स्कूलों के पंजीकरण के लिए 31 जनवरी तक का समय दिया जा सकता है, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया के अंजाम देना होगा। इस दौरान अभिभावकों को आवेदन फॉर्म के लिए 25 रुपए ही चुकाने होंगे और अन्य किसी भी प्रकार के प्रॉसपेक्ट्स व दस्तावेज को खरीदने के लिए स्कूल अभिभावकों पर दबाव नहीं बना सकेंगे। 

दाखिले में पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए जहां एक ओर दाखिले के मापदंड निर्धारण करने का निर्णय स्कूलों को दिया गया है, वहीं लाटरी सिस्टम को भी लागू कर दिया गया है, यानी नियमों के तहत निर्धारित मापदंड़ों को पूरा करने वाले छात्रों का चुनाव स्कूल नहीं, बल्कि उनके बीच होने वाले ड्रा के माध्यम से होगा। 

गाइडलाइंस के निर्धारिण को लेकर सोमवार को कैबिनेट की बैठक में चर्चा होगी जिसमें गुरुवार तक आए स्कूलों के तमाम लिखित सुझावों व आपत्तियों पर भी चर्चा की जाएगी। कैबिनेट की मंजूरी के साथ ही नर्सरी दाखिले की गाइडलाइंस जारी कर दी जाएगी।

मैनेजमेंट कोटे की भी होगी छुट्टी
स्कूलों की माली हालत को बेहतर बनाने के लिए हर साल दाखिले के एवज में फं ड उगाही का जरिया बनने वाला मैनेजमेंट कोटा खत्म होने जा रहा है। 

कुल सीटों का 20 फीसदी रहने वाला यह कोटा अक्सर ऐसे अभिभावकों के काम आता था जो अपने बच्चों की बैक डोर एंट्री के लिए अच्छी खासी कीमत चुका सकते हैं। मैनेजमेंट कोटा खत्म किए जाने को लेकर स्कूल प्रबंधनों में खासी नाराजगी है और सरकार के इस निर्णय को लेकर वे ऐतराज भी जताने लगे हैं। 

फेडरेशन ऑफ पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी मलिक से जब इस बाबत पूछा गया तो उनका कहना था कि यह कोटा खत्म करना गलत है। संसाधनों को बेहतर बनाने और गरीब कोटा लागू होने के चलते स्कूलों पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार की भरपाई और सिफारिशी दाखिलों के लिए मैनेजमेंट कोटा जरूरी है। 

उन्होंने कहा कि इसे लेकर शिक्षा मंत्री को मौखिक ऐतराज जताया जा चुका है और लिखित तौर पर इसकी जानकारी गुरुवार को सुझावों के साथ सौंप दी जाएगी।

खतरे में एकरूपता
पब्लिक स्कूलों को अपने हिसाब से नर्सरी दाखिले के मापदंड तय करने का अधिकार मिलने के साथ ही एक बार फिर से दाखिला प्रक्रिया को लेकर अपनाई जा रही एकरूपता खतरे में पड़ गई है।

राजधानी में स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए उच्च न्यायालय के निर्देशों पर गठित अशोक गांगुली कमेटी की सिफारिशों के तहत तय प्वाइंट सिस्टम को लागू किया गया था। इस व्यवस्था के लागू होने से विभिन्न पब्लिक स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया में एकरूपता आई। इससे प्रशासन के लिए उनकी मॉनिटरिंग आसान हुई। 

लेकिन जिस तरह से केन्द्र की ओर से लागू आरटीई एक्ट के चलते प्वाइंट सिस्टम को खत्म कर स्कूलों को मापदंड तय करने की छूट देने की तैयारी जारी है मुमकिन है कि आने वाले दिनों में एक बार फिर से अभिभावकों की मुश्किल बढ़ जाए और स्कूल मनमानी करते नजर आएं। 

हालांकि इस व्यवस्था में भी कहीं न कहीं गांगुली कमेटी के नेबरहुड, सिबलिंग, एल्युम्नॉय के मानकों को बरकरार रखा गया है, लेकिन इनके पालन को लेकर स्कूल कितने गम्भीर होंगे यह तो क्रियान्वयन के दौरान ही साफ होगा। 

अब नए मानकों से होंगे दाखिले
नर्सरी दाखिले के लिए बीते सालों में राजधानी के स्कूलों में लागू प्वाइंट सिस्टम का गणित इस बार खत्म होने जा रहा है। 

अब एक-एक प्वाइंट के लिए मारामारी नहीं मचेगी, बल्कि विभिन्न मानकों के आधार पर आवेदन स्वीकार कर ड्रा किया जाएगा। मानकों के निर्धारण का फै सला स्कूल करेंगे बस उन्हें इसकी जानकारी शिक्षा निदेशालय को लिखित तौर पर देनी होगी। 

इनमें घर से नजदीकी, सिबलिंग यानी भाई व बहन का स्कूल में पहले से ही पढ़ना या अभिभावकों का स्कूल एल्युम्नॉय की सूची में शामिल होना जैसे मानकों को निर्धारित किया जाएगा। 

इनके बीच उपलब्ध सीटों का बटंवारा कर दाखिले दिए जाएंगे। निदेशालय के आधिकारियों की मानें तो इस मानकों के तहत पहुंचने वाले छात्रों की संख्या सीटों के मुकाबले अधिक होने की स्थिति में लॉटरी यानी ड्रॉ का सहारा लिया जाएगा(दैनिक भास्कर,दिल्ली,30.11.2010)।

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