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07 दिसंबर 2010

नए आईआईटी पर राज्यों की रफ्तार से सिब्बल नाखुश

नए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटी) की मंजूरी के दो साल बाद भी उसकी स्थापना में राज्यों की उदासीनता पर केंद्र ने उन्हें आड़े हाथों लिया है। खास तौर से उनके भवनों व परिसरों के लिए जमीन आवंटन व अन्य दिक्कतों पर मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने दो टूक कह दिया है कि वह इस मसले पर रोज-रोज पंचायत नहीं करना चाहते, लिहाजा राज्य सरकारें निश्चित समय सीमा बताएं कि अड़चनें कब तक दूर होंगी। नए आइआइटी में से खासतौर से जोधपुर (राजस्थान), गांधीनगर (गुजरात), मंडी (हिमाचल प्रदेश) इंदौर (मध्य प्रदेश) और भारतीय प्रबंध संस्थान (आइआइएम) रांची (झारखंड) की स्थापना में जमीन व अन्य मामलों को लेकर आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए सोमवार को सिब्बल ने यहां इन राज्यों व केंद्र के संबंधित मंत्रालयों के अधिकारियों तथा आइआइटी निदेशकों की बैठक बुलाई थी। झारखंड ने सिब्बल की इस बैठक को तवज्जो ही नहीं दी, उसका कोई अधिकारी नहीं आया। बैठक में सिब्बल ने कहा कि राज्य सरकारों ने इन हाई प्रोफाइल संस्थानों को अपने यहां खुलवाने की मंजूरी तो ले ली, लेकिन अब इसमें रुचि नहीं ले रही हैं। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि यह राज्यों का काम है। वह इस मसले पर बार-बार बैठक नहीं करना चाहते, इसलिए राज्य साफ तौर बताएं कि दिक्कतें कब दूर होंगी। सूत्रों के मुताबिक राजस्थान सरकार के अधिकारी ने वादा किया कि उनके यहां इसी महीने 23 तारीख तक आइआइटी को जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी। जबकि गुजरात सरकार के मुख्यसचिव ने कहा कि उनके यहां आइआइटी के लिए सिर्फ 30 साल के लिए दिए गए जमीन के पट्टे को 99 साल तक करने के लिए प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट को भेजा जाने वाला है। मालूम हो कि वहां दी गई 400 एकड़ जमीन में आधा हिस्सा केंद्रीय कृषि मंत्रालय का है, जो चारागाह है। मंत्रालय को उसके दिए जाने पर ऐतराज है। सूत्र बताते हैं कि आइआइटी-मंडी के लिए हिमाचल प्रदेश ने सारी दिक्कतें दूर करने की तारीख से जल्द ही केंद्र को अवगत कराने का भरोसा दिया है, जबकि बैठक में मौजूद मध्य प्रदेश सरकार के अधिकारी ने 31 दिसंबर तक जमीन उपलब्ध करा देने का वादा किया है। वहां आइआइटी को आवंटित 500 एकड़ जमीन में से 190 एकड़ वन विभाग की है। राज्य के अधिकारी ने कहा कि इस बाबत पर्यावरण मंत्रालय से जल्द ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। गौरतलब हो कि आठ नए आइआइटी की मंजूरी के दो साल बाद भी अभी तक सिर्फ आइआइटी-हैदराबाद ने सारी औपचारिकताएं पूरी की हैं। बाकी में कुछ न कुछ दिक्कतें बरकरार है(दैनिक जागरण,दिल्ली,7.12.2010)।

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