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02 दिसंबर 2010

उत्तराखंडःभविष्य को लेकर चिंतित बेरोजगार इंजीनियर

उत्तराखंड जलविद्युत निगम जहां अभियंताओं की कमी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर बीटेक सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा प्राप्त 1200 से अधिक अभ्यर्थी पिछले एक साल से विभाग में नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने के इंतजार में हैं। उत्तराखण्ड जलविद्युत निगम में सहायक अभियंता और अवर अभियंता के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन किए हुए यह बेरोजगार अब अपने भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं। इनका कहना है कि जलविद्युत निगम उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ भी कर रहा है। 25 अक्टूबर 2009 को उत्तराखण्ड टेक्नीकल यूनिवर्सिटी ने इस पदों पर नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा ली थी। बाद में पेपर आउट होने के कारण परीक्षा निरस्त कर दी गई। अभ्यर्थियों का कहना है कि टालने की नीति के तहत फिर बताया गया कि दस अक्टूबर 2010 को परीक्षा होगी, लेकिन परीक्षा नहीं हुई। अभ्यर्थियों की ओर से इस मुद्दे को लेकर अब जलविद्युत निगम के प्रबन्ध निदेशक को भी पत्र भेजा गया है। ताज्जुब यह है कि निगम में सहायक अभियंता, अवर अभियंता के 460 पद रिक्त हैं। इसके बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया के लिए पिछले एक साल से लिखित परीक्षा का आयोजन नहीं हो हो पा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार जलविद्युत निगम ने लिखित परीक्षा कराने के लिए किसी विश्वविद्यालय को नियुक्त करने का अनुरोध करते हुए प्रस्ताव शासन को भेजा है। पंतनगर विश्वविद्यालय से इस परीक्षा को कराने का अनुरोध भी किया जा रहा है। उत्तराखण्ड जलविद्युत निगम के प्रबन्ध निदेशक जीपी पटेल ने कहा कि अभियंताओं की नियुक्ति के लिए किसी शिक्षण संस्थान को शीघ्र ही नियुक्त कर लिखित परीक्षा कराई जाएगी। अभियंताओं की कमी से जूझ रहे निगम में सिविल इंजीनियरों की अपेक्षाकृत ज्यादा कमी है(दैनिक जागरण,श्रीनगर गढ़वाल,2.12.2010)।

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