भारत में ऊर्जा क्षेत्र की रफ्तार तेजी से आगे बढ़ रही है। खासतौर पर भारत अन्य ऊर्जा स्रोतों की जगह सौर ऊर्जा पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान देने की कोशिश में लगा है। अब स्थिति यह हो गई है कि वह पड़ोसी देशों को भी ऊर्जा आपूर्ति करने लगा है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारतीय महत्वाकांक्षी सोलर एनर्जी मिशन के तहत २०२२ तक २०,००० मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य बनाया है। ऊर्जा क्षेत्र में कारोबार और रोजगार की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
सार्वजनिक क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कंपनियां भी अपने कारोबारी विस्तार में लगी हैं। इसी के अंतर्गत "किमाया एनर्जी लिमिटेड" (केईएल) के एमडी एवं प्रबंध निदेशक गौरव खुल्लर ने बताया कि उनकी कंपनी अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के जरिए बिजली की मांग और आपूर्ति की खाई कम करने तथा अन्य महंगे ईंधनों पर निर्भरता करने में अपनी अहम भूमिका निभा रही है। हम लगातार विश्व स्तरीय टेक्नोलॉजी के जरिए सस्ती ऊर्जा पैदा करने के लिए अग्रसर हैं। गौरव ने बताया कि भारत सरकार देश के विभिन्न राज्यों में तेजी के साथ सोलर पावर का विस्तार करने में लगी है। केईएल ने खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर पावर प्लांट लगाने का लक्ष्य बनाया है। खुल्लर ने कहा कि हम विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर सोलर ऊर्जा पैदा कर रहे हैं और हमने आरएंडडी, उत्पादन और परियोजना क्रियान्वयन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की अनुभवी कंपनियों के साथ गठजोड़ किया है।
कंपनी अपने विस्तार कार्यक्रम में आगे बढ़ रही है, जिससे जाहिर है कि इससे इस क्षेत्रों में रोजगार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी भारत के साथ कई ऊर्जा संबंधी सौदे किए हैं। फिर भी देश में अभी विदेशी कंपनियां प्रतिस्पर्धा से बाहर हैं। गौरव खुल्लर ने बताया कि बाजार में विदेशी कंपनियों की प्रत्यक्ष प्रतिस्पर्धा नहीं है। हालांकि यहां संयुक्त उद्यम बनाने की संभावनाएं अपार हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ काम करने की इच्छा जाहिर की। ग्रामीण इलाकों में सौर ऊर्जा की उपलब्धता बेहद जरूरी है। गांव-गांव तक बिजली पहुंचाने के लिए सौर ऊर्जा की अहम भूमिका रहेगी। यह बिजली पैदा करने का सस्ता जरिया है(गौरव खुल्लर,नई दुनिया,दिल्ली,6.12.2010)
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