इंजीनियरिंग कॉलेजों में इस बार जीरो नंबर पाने वालों को एडमिशन नहीं देने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। तकनीकी शिक्षा संचालनालय के अधिकारी फाइल रीओपन कर रहे हैं। बीते कई सालों की तरह इस साल भी इंजीनियरिंग कॉलेजों में जीरो नंबर पाने वालों को भी एडमिशन मिल गया।इसके बावजूद हजारों सीटें खाली रह गईं।
कम नंबर पाने वालों को एडमिशन मिलने से कॉलेजों के स्तरीय होने पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे दूसरे राज्यों में कॉलेजों की छवि खराब हो रही है। इसे सुधारने के लिए पिछले सत्र में छात्रों को प्रवेश देने के लिए एक निश्चित अंक की सिफारिश की गई थी लेकिन निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों के प्रबंधन ने इसका कड़ा विरोध किया था।
इस वजह से फाइल मंत्रालय में ही अटक गई। बड़े अधिकारियों ने फाइल को यह कहकर अटका दिया कि ऐन काउंसिलिंग के समय ऐसा करने से छात्रों को नुकसान हो सकता है।
छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल की ओर से इस साल प्री इंजीनियरिंग टेस्ट की तिथि की घोषणा करने के साथ ही तकनीकी शिक्षा संचालनालय के अधिकारी फिर हरकत में आ गए हैं।
कट ऑफ तय करने की फाइल को रीओपन करने मंत्रालय के चक्कर काट रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार इस विषय में उच्च शिक्षामंत्री हेमचंद यादव से भी जल्दी चर्चा की जाएगी।
कॉलेज बढ़े, स्तर नहीं
नया राज्य बनने के समय वर्ष 2000 में प्रदेश में केवल 10 इंजीनियरिंग कॉलेज थे। दस सालों में कॉलेजों की संख्या बढ़कर 50 हो गई। सीटों की संख्या भी 2000 से बढ़कर 16 हजार हो गई। इसके बावजूद हर साल सात हजार से ज्यादा सीटें खाली रह जाती हैं।
निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों के संचालकों का कहना है कि जीरो नंबर वालों को एडमिशन देने के बाद भी सीटें खाली रह जाती हैं। कट ऑफ तय किया गया तो खाली रहने वाली सीटों की संख्या और बढ़ जाएगी।
दूसरे राज्यों में है कट ऑफ
देश के लगभग सभी राज्यों में इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए एक निश्चित अंक की आवश्यकता होती है। छत्तीसगढ़ में इंजीनियरिंग कॉलेजों की सीटें ज्यादा और छात्र कम होने की वजह से ऐसी स्थिति बनती है। मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान आदि राज्यों में इंजीनियरिंग कॉलेजों में निश्चित अंक प्राप्त करने पर ही प्रवेश दिया जाता है(असगर खान,दैनिक भास्कर,रायपुर,31.112.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।