केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अगले साल 2011 में 10वीं के स्टूडेंट्स के लिए कंडक्ट किए जाने वाले ऑप्शनल प्रोफिशिएंसी टेस्ट की गाइडलाइंस जारी कर दी है।
टेस्ट में मल्टीपल चॉइस टाइप क्वेश्चन होंगे और सभी पांच विषयों, इंग्लिश, हिंदी, सोशल साइंस, मैथ्स और साइंस के लिए यह टेस्ट होगा। टेस्ट ढाई घंटे और 100 नंबर का होगा। टेस्ट में 9वीं व 10वीं क्लास के सिलेबस से जुड़े सवाल होंगे।
टेस्ट में ऑब्जेक्टिव टाइप क्वेश्चन व न्यूमैरिकल्स भी होंगे। स्टूडेंट्स अगर गलत जवाब देंगे तो उनकी नेगेटिव मार्किंग भी होगी। जिस तरह से कंपीटिटिव एग्जामिनेशन होती है, उसी की तर्ज पर बोर्ड ने यह टेस्ट शुरू किया है। टेस्ट में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स को सीबीएसई की ओर से सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। बोर्ड के मुताबिक टेक्स्ट बुक्स के अलावा भी सवाल पूछे जाएंगे(नवभारत टाइम्स,दिल्ली,31.12.2010)।
दैनिक भास्कर की रिपोर्टः
विज्ञान में रुझान हो और पढ़ाई अर्थशास्त्र की करनी पड़े तो भविष्य बहुत अच्छा नहीं हो सकता। 10वीं पास कर 11वीं में स्ट्रीम चयन में ऊहापोह में रहने वाले छात्रों के मार्गदर्शन के लिए सीबीएसई पहली बार प्रोफिशिएंसी टेस्ट कराने जा रही है।
बोर्ड की ओर से मई/ जून 2011 में होने वाली इस वैकल्पिक परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया के बाद अब टेस्ट का प्रारूप ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया गया है। इससे छात्र-छात्राओं को पता चल सकेगा कि उनका मूल्याकंन किन मानकों पर होने जा रहा है।
सीबीएसई चेयरमैन विनीत जोशी की मानें तो इस महत्वाकांक्षी योजना का मूल उद्देश्य दसवीं के बाद अक्सर भूल-चूक से गलत स्ट्रीम का चयन करने जा रहे छात्रों को सही राह दिखाना है।
हालांकि यह टेस्ट वैकल्पिक है और छात्र व उनके अभिभावकों की सहमति से ही लिया जा रहा है। इस टेस्ट में सभी अंग्रेजी, हिन्दी, गणित, विज्ञान व सामाजिक ज्ञान विषय उपलब्ध हैं।
आवेदन प्रक्रिया के दौरान छात्रों को यह विकल्प उपलब्ध कराया गया कि वह टेस्ट के लिए एक-दो विषय को चुनें या फिर सभी को। टेस्ट में बैठने के इच्छुक छात्रों की मदद के लिए प्रारूप ऑनलाइन किया गया है।
इस प्रारूप के तहत गणित व विज्ञान के सैम्पल पेपरों के माध्यम से बताया गया कि आखिरी टेस्ट में क्या पूछा जाएगा और उसके लिए किन मानकों पर मूल्याकंन होगा।
बोर्ड के प्रारूप के मुताबिक टेस्ट तीन हिस्सों में बांटा गया है पहला हिस्सा बहुविकल्पीय प्रश्नों का होगा, दूसरा हिस्सा गणना आधारित प्रश्नों का होगा, जबकि तीसरा हिस्सा पूरी तरह से कॉलम मिलान के सवालों वाला होगा।
इन तीनों ही माध्यम से ९वीं व १क्वीं के पाठच्यक्रमों के आधार पर छात्रों की क्षमताओं, ज्ञान और समस्याओं के निदान की कला को परखा जाएगा।
बोर्ड की ओर से तैयार प्रारूप के मुताबिक इस प्रश्नपत्र में बहुविकल्पीय प्रश्नों के गलत उत्तर देने पर नेगेटिव मार्किग होगी, जिसके चलते प्रत्येक गलत जवाब के लिए 2/3 अंक कटेंगे। ढाई घंटे का यह प्रश्नपत्र 100 अंकों का होगा और सवालों के जवाब मशीन-ग्रेडेबल होंगे यानी जवाब का आंकलन ऑटोमेटिक संभव होगा।
दैनिक भास्कर की रिपोर्टः
विज्ञान में रुझान हो और पढ़ाई अर्थशास्त्र की करनी पड़े तो भविष्य बहुत अच्छा नहीं हो सकता। 10वीं पास कर 11वीं में स्ट्रीम चयन में ऊहापोह में रहने वाले छात्रों के मार्गदर्शन के लिए सीबीएसई पहली बार प्रोफिशिएंसी टेस्ट कराने जा रही है।
बोर्ड की ओर से मई/ जून 2011 में होने वाली इस वैकल्पिक परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया के बाद अब टेस्ट का प्रारूप ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया गया है। इससे छात्र-छात्राओं को पता चल सकेगा कि उनका मूल्याकंन किन मानकों पर होने जा रहा है।
सीबीएसई चेयरमैन विनीत जोशी की मानें तो इस महत्वाकांक्षी योजना का मूल उद्देश्य दसवीं के बाद अक्सर भूल-चूक से गलत स्ट्रीम का चयन करने जा रहे छात्रों को सही राह दिखाना है।
हालांकि यह टेस्ट वैकल्पिक है और छात्र व उनके अभिभावकों की सहमति से ही लिया जा रहा है। इस टेस्ट में सभी अंग्रेजी, हिन्दी, गणित, विज्ञान व सामाजिक ज्ञान विषय उपलब्ध हैं।
आवेदन प्रक्रिया के दौरान छात्रों को यह विकल्प उपलब्ध कराया गया कि वह टेस्ट के लिए एक-दो विषय को चुनें या फिर सभी को। टेस्ट में बैठने के इच्छुक छात्रों की मदद के लिए प्रारूप ऑनलाइन किया गया है।
इस प्रारूप के तहत गणित व विज्ञान के सैम्पल पेपरों के माध्यम से बताया गया कि आखिरी टेस्ट में क्या पूछा जाएगा और उसके लिए किन मानकों पर मूल्याकंन होगा।
बोर्ड के प्रारूप के मुताबिक टेस्ट तीन हिस्सों में बांटा गया है पहला हिस्सा बहुविकल्पीय प्रश्नों का होगा, दूसरा हिस्सा गणना आधारित प्रश्नों का होगा, जबकि तीसरा हिस्सा पूरी तरह से कॉलम मिलान के सवालों वाला होगा।
इन तीनों ही माध्यम से ९वीं व १क्वीं के पाठच्यक्रमों के आधार पर छात्रों की क्षमताओं, ज्ञान और समस्याओं के निदान की कला को परखा जाएगा।
बोर्ड की ओर से तैयार प्रारूप के मुताबिक इस प्रश्नपत्र में बहुविकल्पीय प्रश्नों के गलत उत्तर देने पर नेगेटिव मार्किग होगी, जिसके चलते प्रत्येक गलत जवाब के लिए 2/3 अंक कटेंगे। ढाई घंटे का यह प्रश्नपत्र 100 अंकों का होगा और सवालों के जवाब मशीन-ग्रेडेबल होंगे यानी जवाब का आंकलन ऑटोमेटिक संभव होगा।
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