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22 दिसंबर 2010

राजस्थानःव्याख्याताओं के एक-तिहाई पद अब भी खाली

शिक्षा विभाग ने कार्मिक विभाग की अनुमति से माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त प्रधानाध्यापकों के पद तो पातेय वेतन पदोन्नति से भर दिए, लेकिन व्याख्याताओं के एक तिहाई पद अब भी खाली हैं। शिक्षा विभाग में वर्तमान में व्याख्याताओं के 19575 पद हैं। इनमें से 8344 पद रिक्त चल रहे थे।

राजस्थान लोक सेवा आयोग से चयनित करीब 1800 व्याख्याताओं के पदस्थापन के बाद भी 6544 से पद रिक्त रह जाएंगे। हालांकि विभाग में डीपीसी की प्रक्रिया भी जारी है, लेकिन यह प्रक्रिया धीमी होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र की अधिकांश स्कूलें अब भी व्याख्याताओं का इंतजार कर रही हैं। अब आरपीएससी से चयनित होकर आए अभ्यर्थियों को पदस्थापन का सिलसिला शुरू हो चुका है। इसके बावजूद व्याख्याताओं की कमी पूरी नहीं हो पाएगी।

पातेय वेतन पदोन्नति से उम्मीद
विभाग में द्वितीय श्रेणी शिक्षकों में स्नातकोत्तर की डिग्री के साथ पर्याप्त अर्हता रखने वाले शिक्षकों की भी कमी नहीं है। ऎसे में विभाग एक बार फिर कार्मिक विभाग से अनुमति लेकर पातेय वेतन पदोन्नति से शिक्षकों को व्याख्याता के रूप में स्कूलों में नियुक्त कर सकता है।

नए संकाय भी खाली
राज्य सरकार ने पिछले दो सालों में करीब पांच सौ स्कूलों में नए संकाय खोले हैं। इनमें से हर संकाय को करीब तीन व्याख्याताओं की दरकार होगी। अब तक इनके लिए जरूरी पंद्रह सौ पद भी सृजित नहीं किए गए हैं। ऎसे में नया संकाय खुलने के बाद इन स्कूलों में छात्रों का प्रवेश नहीं हो पा रहा है। जहां विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है वहां पढ़ाने के लिए व्याख्याता नहीं मिल रहे हैं(राजस्थान पत्रिका,बीकानेर,22.12.2010)।

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