जेपीएससी ने सहायक और निजी सहायक पद पर नियुक्ति के लिए 22 सितंबर 2003 को विज्ञापन निकाला था। सहायक के 10 और निजी सहायक के तीन पदों पर नियुक्ति होनी थी। इसके लिए प्रतियोगिता परीक्षा 25 फरवरी 2007 को हुई।
परीक्षा होने के तीन वर्षो बाद जेपीएससी के सहायक ने परीक्षा नियंत्रक को फाइल भेजी। विज्ञापन प्रकाशित करने के सात वर्ष और परीक्षा लेने के लगभग चार वर्ष बाद जेपीएससी को महसूस हुआ कि उसने जो परीक्षा ली थी, उसमें कुछ तकनीकी गलती थी, फिर क्या था, यह परीक्षा ही रद्द कर दी गई। परीक्षा निरस्त करने के लिए किसी भी जांच समिति की आवश्यकता महसूस नहीं की गई।
बिहार में सचिवालय सहायक, निजी सहायक पद पर नियुक्ति के लिए लागू बिहार सहायक संयुक्त संवर्ग नियमावली को झारखंड ने वर्ष 2002 में अंगीकृत किया था। इसी नियमावली के तहत यह परीक्षा ली जानी थी। आयोग के अधिकारियों को सात वर्ष बाद यह ख्याल आया कि उक्त नियमावली के तहत यह परीक्षा नहीं ली गई थी। निर्धारित परीक्षा प्रक्रिया के विरुद्ध सहायक पदों के लिए कम पत्रों की परीक्षा ली गई थी, जबकि निजी सहायक के लिए हुई परीक्षा अनावश्यक थी।
आरसी कैथल ने जतायी थी आशंका
वर्ष 2003 में विज्ञापन प्रकाशित करने के बाद वर्ष 2007 में परीक्षा लेना और सात वर्षो तक इस पूरी प्रक्रिया को लंबित रखना एक गंभीर व विचारणीय विषय है। ऐसी स्थिति में यदि इस विज्ञापन को इतने वर्षो के बाद निरस्त किया जाता है तो लोग न्यायालय जा सकते हैं। इस अवधि में कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति उम्र सीमा समाप्त हो चुकी होगी।
उठ रहे सवाल
1. इस तकनीकी गलती के लिए कौन जिम्मेवार हैं?
2. समय रहते इसकी पड़ताल क्यों नहीं हुई?
3. सात वर्षो तक जेपीएससी अधिकारी क्या कर रहे थे?
4. जिनकी उम्र सीमा समाप्त हो गई, उनका क्या होगा?
5. तीन वर्षो तक फाइल दबाए रखनेवाले सहायक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
6. परीक्षा की तिथि के बारे में घोषणा क्यों नहीं की जा रही है?
7. संचिका के कई पेज गायब बताए गए हैं, इसकी जांच क्यों नहीं
करायी गयी?
त्रुटियों को देखते हुए दिया था सुझाव
1. परीक्षा निरस्त कर नये सिरे से हो इम्तहान।
2. 2002 की नियमावली व निर्धारित पाठच्यक्रम के तहत हो परीक्षा।
3. पूर्व की परीक्षा में सम्मिलित अभ्यर्थी को ही इस परीक्षा में शामिल किया जाए।
4. निजी सहायक पद पर नियुक्ति के लिए लिखित परीक्षा का प्रावधान नहीं है। हिन्दी आशुलेखन एवं हिन्दी- अंग्रेजी टंकण की जांच परीक्षा लेने का प्रावधान है।
हां, यह सच है कि तीन साल विलंब से यह संचिका परीक्षा नियंत्रक के पास भेजी गई थी। कार्यालय सहायक ने इसका कोई कारण नहीं बताया था। इस बाबत शो- कॉज होना चाहिए था। तकनीकी कारणों से यह परीक्षा रद्द हुई है। यह परीक्षा शीघ्र होगी, पर कब होगी, स्पष्ट नहीं कह सकता।
आरसी कैथल, कार्यकारी अध्यक्ष जेपीएससी
तकनीकी गलती का सुधार पहले ही होना चाहिए था। तीन- तीन वर्षो तक फाइल रखना क्राइम है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि किसकी गलती से परीक्षा रद्द हुई। यह प्रदेश के युवाओं के साथ ठगी का मामला है। इस बाबत निगरानी में एफआइआर दर्ज कराउंगा।
सुनील कुमार महतो, सूचना अधिकार कार्यकर्ता(विनय चतुर्वेदी,दैनिक भास्कर,रांची,16.1.11)
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